ग्रोथ इंजन में आई तेज़ी
जनवरी में India Services PMI का आंकड़ा 58.5 पर पहुँच गया, जो दिसंबर के 58.0 से एक महत्वपूर्ण उछाल है। यह तेज़ी मुख्य रूप से नए बिज़नेस में ज़बरदस्त वृद्धि और आउटपुट में बढ़ोतरी के कारण आई। इसी के साथ, HSBC India Composite PMI Output Index भी दिसंबर के 57.8 से बढ़कर 58.4 हो गया, जो भारतीय प्राइवेट सेक्टर की मज़बूत ग्रोथ का संकेत देता है।
कंपनियों ने बढ़ते काम को संभालने के लिए रोज़गार के अवसर बढ़ाए हैं, जो कि पिछले कुछ समय से चले आ रहे ठहराव के बाद एक सकारात्मक बदलाव है। साथ ही, बिज़नेस कॉन्फिडेंस भी तीन महीनों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण एफिशिएंसी में सुधार और नए क्लाइंट्स का जुड़ना बताया जा रहा है। नए ऑर्डर्स की रफ्तार पिछले दो महीनों में सबसे तेज़ रही है, जिसमें साउथ और साउथईस्ट एशिया जैसे क्षेत्रों से मिले अंतर्राष्ट्रीय डिमांड का भी अहम योगदान रहा।
ग्लोबल चुनौतियों के बीच मज़बूत ग्रोथ
खास बात यह है कि India Services Sector की यह ग्रोथ कई दूसरे ग्लोबल मार्केट्स से काफी बेहतर है, जो अभी सुस्त ग्रोथ से जूझ रहे हैं। दुनिया भर में महंगाई और सख्त मॉनेटरी पॉलिसी के चलते ग्रोथ धीमी है, वहीं भारत का यह मजबूत आंकड़ा मुख्य रूप से घरेलू डिमांड पर आधारित है।
कीमतों के मोर्चे पर कुछ मिली-जुली तस्वीर दिख रही है। इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन में मामूली बढ़ोतरी देखी गई है, जिसका असर सबसे ज़्यादा कंज्यूमर सर्विसेज सेक्टर पर हुआ है। इसी तरह, आउटपुट चार्जेज़ भी बढ़े हैं, खासकर फाइनेंस एंड इंश्योरेंस सेक्टर में। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बढ़ोतरी पिछले महीनों की तुलना में 'काफी हल्की' है।
यह स्थिति बताती है कि महंगाई के संकेत तो हैं, लेकिन वे अभी इतने ज़्यादा नहीं हैं कि कंज्यूमर खर्च या बिज़नेस इन्वेस्टमेंट पर भारी पड़ें। ऐसे में, रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की भूमिका अहम हो जाती है, जो ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करेगा।
भविष्य को लेकर आशावादी नज़रिया
आगे चलकर, इंडिया की सर्विस सेक्टर में बिज़नेस कॉन्फिडेंस तीन महीनों के हाई पर पहुँच गया है। कंपनियों को एफिशिएंसी में सुधार और नए क्लाइंट्स से काफी उम्मीदें हैं। इस पॉजिटिविटी और लगातार बनी रहने वाली डिमांड के चलते, सेक्टर नज़दीकी भविष्य में अच्छी ग्रोथ दिखा सकता है।
बड़े वित्तीय संस्थान 2026 में भारत की इकोनॉमी के लिए सर्विसेज-आधारित ग्रोथ का अनुमान लगा रहे हैं। यह अनुमान ग्लोबल डिमांड और डोमेस्टिक पॉलिसी मैनेजमेंट पर निर्भर करेगा, हालांकि ग्लोबल आर्थिक चुनौतियों पर नज़र रखना भी ज़रूरी होगा।
