भारत का सर्विस सेक्टर सितंबर में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और PMI बढ़कर **55.2** पर पहुंच गया है। हालांकि, एक्सपोर्ट ऑर्डर्स में आई कमी और सुस्त होती हायरिंग कंपनियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
सर्विस सेक्टर में मजबूती, लेकिन चुनौतियां बरकरार
सितंबर महीने में भारत के सर्विस सेक्टर ने मजबूती दिखाई है। HSBC इंडिया सर्विसेज परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त के 54.1 से बढ़कर 55.2 पर पहुंच गया है। इस वृद्धि के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू मांग (Domestic Demand) है, खासकर फाइनेंशियल, कंज्यूमर और डिजिटल सर्विसेज में।
एक्सपोर्ट में सुस्ती का दबाव
सितंबर के आंकड़े सकारात्मक जरूर लग रहे हैं, लेकिन अगर हम जुलाई-सितंबर तिमाही के औसत को देखें, तो यह 2022 की शुरुआत के बाद सबसे निचले स्तर पर है। इसका मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय मांग में भारी गिरावट है। एक्सपोर्ट ऑर्डर्स की रफ्तार पिछले 3 साल में सबसे धीमी हो गई है, जो यह दर्शाता है कि ग्लोबल मार्केट का सपोर्ट अब कम मिल रहा है।
निवेशकों के लिए 'टग-ऑफ-वार'
निवेशकों के लिए इस डेटा में दो अलग तस्वीरें दिख रही हैं:
- लागत में कमी: सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए इनपुट कॉस्ट इन्फ्लेशन 10 महीने के निचले स्तर पर आ गई है। इससे मार्जिन्स सुरक्षित रहने की उम्मीद है, बशर्ते कंपनियां अपनी प्राइसिंग बनाए रखें।
- कंपनियों में सावधानी: कॉरपोरेट कॉन्फिडेंस अभी भी सतर्क है। मात्र 16% कंपनियां ही अगले साल बड़े विस्तार की उम्मीद कर रही हैं। हायरिंग एक्टिविटी भी सुस्त है, जो जिओपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के चलते बनी अनिश्चितता को दर्शाती है।
आने वाले समय में, आईटी और ग्लोबल सर्विस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर नजर रखना जरूरी होगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इनपुट कॉस्ट में आई राहत कंपनियों के बॉटम-लाइन पर असर डालती है या नहीं।
