एक्सपोर्ट का दम, डोमेस्टिक कमजोरी जारी
S&P Global-HSBC Services Purchasing Managers' Index (PMI) के अनुसार, भारत का सर्विस सेक्टर जनवरी में मजबूती से उभरा। यह लगातार 54वां महीना है जब सेक्टर में विस्तार देखा गया है, जो 2005 के बाद सबसे लंबी लगातार ग्रोथ की स्ट्रीक है। इस तेज़ी की सबसे बड़ी वजह नए एक्सपोर्ट बिज़नेस का तेज़ी से बढ़ना रहा, जिसमें नवंबर के बाद सबसे मज़बूत ग्रोथ दर्ज की गई। इंडोनेशिया, कतर, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों से डिमांड बढ़ी है।
हालांकि, यह अच्छी खबर अपने साथ कुछ चिंताएं भी लाई है। डोमेस्टिक डिमांड में उम्मीद के मुताबिक सुधार नहीं हुआ और नौकरियों में बढ़ोतरी (hiring) काफी धीमी रही। इसका मतलब है कि बढ़ते नए ऑर्डर्स के बावजूद कंपनियाँ नई नियुक्तियों को लेकर सतर्क दिख रही हैं।
बढ़ती लागतें और लागतें पास करने का दबाव
सर्विसेज सेक्टर पर लागत का दबाव भी बढ़ा है। इनपुट प्राइस (Input Prices) पिछले 4 महीनों में सबसे तेज़ी से बढ़े हैं। इस वजह से कंपनियों को अपने कस्टमर्स से इन बढ़ी हुई लागतों का कुछ हिस्सा वसूलने के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ी हैं। इससे भविष्य में कंज्यूमर डिमांड पर असर पड़ने का खतरा है।
इन चुनौतियों के बावजूद, बिज़नेस कॉन्फिडेंस (Business Confidence) में सुधार देखा गया है। कंपनियाँ आने वाले साल को लेकर ज़्यादा आशावादी हैं और ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) में सुधार और नए बिज़नेस अवसरों की उम्मीद कर रही हैं।
मैन्युफैक्चरिंग और कंपोजिट PMI में भी सुधार
सर्विस सेक्टर के साथ-साथ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। HSBC India Manufacturing PMI जनवरी में 55.4 रहा, जो दिसंबर के 55.0 से ज़्यादा है। दोनों सेक्टरों को मिलाकर बनने वाला कंपोजिट PMI भी जनवरी में 58.4 पर पहुँच गया, जो दिसंबर में 57.8 था। यह दिखाता है कि इकोनॉमी में ओवरऑल एक्टिविटी बढ़ी है।
ग्लोबल मंदी और आगे की राह
यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल ट्रेड ग्रोथ धीमी पड़ रही है, WTO के अनुसार 2026 में यह सिर्फ 0.5% रहने का अनुमान है। चीन की सर्विसेज PMI 52.3 पर है, जो भारत की 58.5 से काफी कम है। विश्लेषकों का मानना है कि भारत को अभी भी डोमेस्टिक डिमांड बढ़ाने और इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने की ज़रूरत है। सर्विस एक्सपोर्ट्स इकोनॉमी का एक बड़ा हिस्सा (60% GVA) हैं, लेकिन करेंसी को स्टेबल रखने के लिए गुड्स ट्रेड (Goods Trade) में भी मज़बूती लानी होगी। HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा है कि मार्किट स्टेबिलिटी के लिए पॉलिसी पर कंट्रोल और फिस्कल कंसॉलिडेशन ज़रूरी है।
