India Services PMI: 53 महीनों में सबसे धीमी रफ्तार! जुलाई में ग्रोथ घटकर 53.3 पर

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India Services PMI: 53 महीनों में सबसे धीमी रफ्तार! जुलाई में ग्रोथ घटकर 53.3 पर

भारत की सर्विस सेक्टर में जुलाई के महीने में सुस्ती देखने को मिली है। परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) जून के 57.4 से घटकर 53.3 पर आ गया है। हालांकि, डोमेस्टिक डिमांड पर प्रतिस्पर्धा का दबाव है, वहीं एक्सपोर्ट आर्डर्स मजबूत बने हुए हैं। ऐसे में निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्या यह धीमी मांग आने वाली तिमाहियों में सर्विस-केंद्रित फर्मों के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करती है।

53 महीनों में सबसे धीमी ग्रोथ

जुलाई 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर में पिछले चार सालों से अधिक समय में सबसे धीमी ग्रोथ दर्ज की गई है। लेटेस्ट परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आंकड़ों के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले महीने के 57.4 से गिरकर 53.3 पर आ गया है। 50 से ऊपर का कोई भी आंकड़ा ग्रोथ का संकेत देता है, लेकिन इस तेज गिरावट ने भारतीय अर्थव्यवस्था के इंजन में नरमी का रुझान दिखाया है।

मांग पर दबाव और एक्सपोर्ट में मजबूती

इस सुस्ती का मुख्य कारण डोमेस्टिक मार्केट की चुनौतियां हैं। कंपनियों ने बताया कि नए बिजनेस का इनफ्लो 2022 की शुरुआत के बाद सबसे धीमी गति से बढ़ रहा है। इसकी वजह कड़ी प्रतिस्पर्धा और कस्टमर इंक्वायरी में आई कमी है। डोमेस्टिक एक्टिविटी में नरमी के बावजूद, एक्सपोर्ट बिजनेस एक सकारात्मक पहलू बना हुआ है। कंपनियों ने UAE, UK और US सहित अंतरराष्ट्रीय बाजारों से नए ऑर्डर हासिल करने में सफलता की सूचना दी है, जिसने डोमेस्टिक गिरावट को कुछ हद तक सहारा दिया है।

प्रॉफिट मार्जिन और इनपुट कॉस्ट

बिजनेस एक्टिविटी में धीमी ग्रोथ के बावजूद, कई सर्विस फर्मों की वित्तीय स्थिति स्थिर नजर आ रही है। इस महीने प्रॉफिट मार्जिन में सुधार के संकेत मिले हैं। ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि इनपुट कॉस्ट (जैसे फ्यूल, लेबर और टेक्नोलॉजी एक्सपेंसेस) में बढ़ोतरी की दर पिछले छह महीनों में सबसे कम रही। इसके अलावा, कई फर्मों ने अपनी सेलिंग प्राइस बढ़ाने में कामयाबी हासिल की, जिससे नए बिजनेस ग्रोथ की मात्रा धीमी होने के बावजूद वे अपने प्रॉफिट मार्जिन को सुरक्षित रखने में सफल रहीं।

हायरिंग और बिजनेस आउटलुक

जुलाई के दौरान हायरिंग एक्टिविटी स्थिर लेकिन सतर्क रही। ज्यादातर फर्मों ने महत्वपूर्ण विस्तार के बजाय स्थिर पेरोल नंबरों की सूचना दी। यह मैनेजमेंट टीमों द्वारा 'वेट-एंड-वॉच' दृष्टिकोण को दर्शाता है, क्योंकि सर्विस सेक्टर में बिजनेस कॉन्फिडेंस सात महीने के निचले स्तर पर गिर गया है। कंपनियां कठिन बाजार स्थितियों और बढ़ती प्रतिस्पर्धा की वर्तमान वास्तविकता के मुकाबले भविष्य की मांग के लिए अपनी उम्मीदों को संतुलित कर रही हैं।

निवेशकों को IT, बैंकिंग और कंज्यूमर सर्विसेज जैसे सर्विस-हैवी सेक्टर्स की कंपनियों के आने वाले तिमाही नतीजों पर बारीकी से नजर रखनी चाहिए। मुख्य बात यह होगी कि क्या ये फर्म अपने प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रख सकती हैं, अगर डोमेस्टिक मांग सुस्त बनी रहती है या प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण का दबाव बढ़ता है। आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण एक्सपोजर वाली कंपनियों के लिए एक्सपोर्ट मांग की स्थिरता भी एक महत्वपूर्ण कारक होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.