भारत ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में अब तक का सबसे ज्यादा **$94.53 अरब** का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) हासिल किया है। 'मेक इन इंडिया' के दम पर देश की इकोनॉमी कंजम्पशन से मैन्युफैक्चरिंग की ओर शिफ्ट हो रही है, जो निवेशकों के लिए लंबी अवधि में बड़े मौके पैदा कर सकता है।
मैन्युफैक्चरिंग की नई उड़ान
भारत की औद्योगिक यात्रा के लिए यह एक मील का पत्थर है। FY26 में आया $94.53 अरब का FDI इस बात का सबूत है कि ग्लोबल मार्केट का भरोसा भारतीय बाजार पर कितना मजबूत है। साल 2014 से अब तक कुल इन्वेस्टमेंट $843 अरब के पार पहुंच चुका है।
PLI स्कीम का कमाल
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा हाथ प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम का है। इन प्रोग्राम्स ने ₹2.40 लाख करोड़ का वास्तविक कैपिटल स्पेंडिंग ट्रिगर किया है, जिससे ₹23.8 लाख करोड़ का प्रोडक्शन और सेल्स संभव हो पाया है।
निवेशकों को अब यह देखना होगा कि जब ये सब्सिडी धीरे-धीरे कम होंगी, तब कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन और कॉम्पिटिटिवनेस को कैसे बनाए रखती हैं।
किन सेक्टर्स पर है फोकस?
- इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम
- मेडिकल डिवाइसेस
- ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री
सरकार अब नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम के जरिए लॉजिस्टिक्स कॉस्ट कम करने पर काम कर रही है। ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटीज का निर्माण भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को ग्लोबल स्तर पर किफायती बनाने का एक बड़ा प्रयास है।
निवेशकों के लिए जरूरी सलाह
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भी क्रांति आ रही है, जैसा कि Open Network for Digital Commerce (ONDC) के 470 करोड़ से ज्यादा ऑर्डर्स से साफ है। हालांकि, निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि इस बड़े कैपिटल इनफ्लो की सफलता प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरे होने पर टिकी है। ग्लोबल डिमांड में सुस्ती या इंफ्रास्ट्रक्चर में देरी रिटर्न पर असर डाल सकती है, इसलिए कंपनियों के रेवेन्यू ग्रोथ और उनके कैपेसिटी एक्सपेंशन पर नजर रखना समझदारी होगी।
