Indian Market: इकोनॉमी की रफ्तार तेज, फिर भी FPIs का भारी मोहभंग; भारत से बाहर निकला **$26.75 बिलियन**

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Market: इकोनॉमी की रफ्तार तेज, फिर भी FPIs का भारी मोहभंग; भारत से बाहर निकला **$26.75 बिलियन**

देश की इकोनॉमी शानदार प्रदर्शन कर रही है, लेकिन विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भारत का बाजार आकर्षण खोता दिख रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में विदेशी निवेशकों ने बाजार से **$26.75 बिलियन** की निकासी की है, जो इनफ्लो में **16.6%** की गिरावट दर्शाता है।

भारतीय बाजार इस समय एक दोराहे पर खड़ा है। जहां एक तरफ देश की जीडीपी ग्रोथ का दम दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ विदेशी निवेशकों (FPIs) का रुख काफी सतर्क है। सितंबर 2026 के अंत तक विदेशी निवेशकों ने $26.75 बिलियन की पूंजी भारतीय बाजार से बाहर निकाली है।

ग्रॉस और नेट निवेश का बड़ा अंतर

आंकड़ों की गहराई में जाएं तो मामला और भी दिलचस्प है। भारत में $94.5 बिलियन का रिकॉर्ड ग्रॉस फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) आया है, लेकिन नेट निवेश सिर्फ $7.7 बिलियन पर सिमट गया। इसकी मुख्य वजह यह है कि विदेशी निवेशकों ने $53.58 बिलियन की राशि प्रॉफिट रीपैट्रिएशन और विनिवेश के जरिए वापस अपने देश भेज दी है।

क्रूड और करेंसी का दबाव

बाजार पर दबाव की प्रमुख वजहें बाहरी हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $107 से $108 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत का करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ रहा है। इसका सीधा असर रुपये पर पड़ रहा है, जो 96 प्रति डॉलर के करीब कारोबार कर रहा है। इसके अलावा, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे देशों में एआई (AI) सेक्टर की मांग के चलते भी ग्लोबल फंड्स भारत से शिफ्ट हो रहे हैं।

डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स का सुरक्षा कवच

इस कठिन दौर में घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने मार्केट को संभाले रखा है। म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस कंपनियों की हिस्सेदारी मार्च 2026 तक रिकॉर्ड 17% पहुंच गई है। इन्होंने विदेशी बिकवाली के दबाव को बखूबी सोख लिया है, जिससे बाजार में बड़ी गिरावट नहीं देखी गई।

आगे क्या रखें ध्यान?

निवेशकों को अब ग्लोबल एनर्जी कॉस्ट और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर नजर रखनी होगी। अगर कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो फ्यूल-इंटेंसिव कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ना तय है। बाजार की स्थिरता के लिए रुपये का स्तर और आरबीआई (RBI) का हस्तक्षेप आने वाले महीनों में सबसे अहम इंडिकेटर रहेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.