भारत ने खादी बिक्री और डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। e-Sanjeevani प्लेटफॉर्म पर अब **50 करोड़** से ज्यादा टेलीकंसल्टेशन हो चुके हैं, जो एग्री-एक्सपोर्ट और टेक-इनेबल्ड हेल्थकेयर में बड़े अवसरों का संकेत दे रहे हैं।
खादी की बंपर बिक्री और लोकल ब्रांड्स का दम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में घरेलू उद्योगों की प्रगति पर जोर दिया है। गांधी जयंती के मौके पर खादी उत्पादों की बिक्री ने ₹28 करोड़ का आंकड़ा पार कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह बताता है कि भारतीय बाजार में अब हेरिटेज ब्रांड्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है, जिससे लोकल मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन को काफी मजबूती मिल रही है।
एग्री-एक्सपोर्ट में नई पहचान
भारत के पारंपरिक कृषि उत्पादों की मांग वैश्विक बाजारों में बढ़ रही है। बिहार के पूर्णिया का मखाना और कर्नाटक के कलबुर्गी की दालें अब ग्रीस और मालदीव जैसे देशों तक पहुंच रही हैं। महाराष्ट्र के 'शबरी नेचुरल्स' जैसी पहल ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय एग्री-ब्रांड्स अब रॉ-मटेरियल के बजाय ग्लोबल वैल्यू-एडिशन पर ध्यान दे रहे हैं, जो इस सेक्टर की कंपनियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
डिजिटल हेल्थ और इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार
हेल्थ-टेक की बात करें तो e-Sanjeevani प्लेटफॉर्म ने 50 करोड़ टेलीकंसल्टेशन का माइलस्टोन छू लिया है। 1.9 लाख 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' के नेटवर्क ने दूर-दराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को आसान बना दिया है। यह बुनियादी ढांचा मेडिकल टेक्नोलॉजी, रिमोट डायग्नोस्टिक्स और हेल्थ-टेक सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों के लिए भविष्य के बड़े अवसर खोल रहा है।
टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप का भविष्य
आईआईटी मद्रास के 'सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर' में 'परम शक्ति' सुपरकंप्यूटर के जरिए मेडिकल रिसर्च को नई धार दी जा रही है। वहीं, स्टार्टअप इकोसिस्टम में AI-आधारित कैंसर स्क्रीनिंग और इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी टेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स उभर रहे हैं। सरकार का साफ फोकस अब वैल्यू चेन को ऊपर ले जाने पर है, जो निवेशकों के लिए लंबी अवधि में नए ग्रोथ इंजन साबित हो सकते हैं।
