ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक नई स्टडी के अनुसार, भारत में **2.8 करोड़** बच्चे अपने परिवार के ऐसे पहले सदस्य हैं जिन्होंने कम से कम **6 साल** की स्कूली शिक्षा पूरी की है। यह शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी प्रगति है, लेकिन रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इन परिवारों को अभी भी गरीबी और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा की नई तस्वीर
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की हालिया रिसर्च ने भारत के ह्यूमन कैपिटल लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव दिखाया है। देश में 2.8 करोड़ बच्चे अब अपने परिवारों की पहली पीढ़ी हैं, जो औपचारिक शिक्षा के 6 साल के पड़ाव को पार कर चुके हैं। उन लाखों बच्चों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, जो पहले कभी स्कूल नहीं जा पाते थे।
गरीबी की दोहरी मार
हालाँकि, शिक्षा में सुधार के बावजूद रिपोर्ट एक कड़वी सच्चाई सामने लाती है। साक्षरता दर तो बढ़ी है, लेकिन ये बच्चे अभी भी 'मल्टी-डायमेंशनल पॉवर्टी' (बहुआयामी गरीबी) के साये में जी रहे हैं। इसका मतलब है कि घर में स्कूल की पढ़ाई तो पहुँच गई है, लेकिन अभी भी पीने का साफ पानी, बिजली और उचित हेल्थकेयर जैसी बुनियादी चीजें नसीब नहीं हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि केवल स्कूल जाने से ही सुख-समृद्धि नहीं आ सकती जब तक आधारभूत सुविधाएं न हों।
सरकारी नीतियों पर उठे सवाल
स्टडी में सोशल वेलफेयर प्रोग्राम्स की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। अक्सर सरकारी योजनाएं पूरे परिवार को एक यूनिट मानकर लागू की जाती हैं, जो कि गलत हो सकता है। उदाहरण के लिए, एक ही घर में एक बच्चा स्कूल जा रहा होता है और दूसरा नहीं, या एक सदस्य कुपोषित है और दूसरा नहीं। इसीलिए, अब ऐसी नीतियों की जरूरत है जो व्यक्तिगत स्तर पर काम कर सकें, ताकि भुखमरी और साफ-सफाई जैसी दिक्कतों को दूर किया जा सके।
क्षेत्रीय रुझान
क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो भारत के साथ-साथ भूटान और बांग्लादेश में रुझान काफी उत्साहजनक हैं। खास बात यह है कि इन देशों में लड़कों के मुकाबले लड़कियां 'फर्स्ट-जनरेशन लर्नर' के रूप में ज्यादा तेजी से आगे आ रही हैं। यह स्थिति अफगानिस्तान और पाकिस्तान से बिल्कुल उलट है, जहां आज भी शिक्षा के रास्ते में जेंडर के आधार पर बड़ी रुकावटें हैं। अंत में, रिपोर्ट का निष्कर्ष यही है कि भारत के लॉन्ग-टर्म विकास के लिए केवल शिक्षा ही काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर समन्वय बहुत जरूरी है।
