Salary Hikes 2027: खुश हो जाइए! भारत में सैलरी बढ़ने वाली है, पर इन सेक्टरों के निवेशकों को रहना होगा सावधान

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AuthorNeha Patil|Published at:
Salary Hikes 2027: खुश हो जाइए! भारत में सैलरी बढ़ने वाली है, पर इन सेक्टरों के निवेशकों को रहना होगा सावधान

साल 2027 में भारतीय कंपनियों में औसत सैलरी में **9.1%** की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। NBFC और एनर्जी कंपनियां इस दौड़ में सबसे आगे हैं, लेकिन **18%** का हाई एट्रिशन रेट और बढ़ता अनुपालन खर्च निवेशकों की चिंता बढ़ा सकता है।

कॉर्पोरेट इंडिया 2027 के लिए अपनी पेरोल रणनीति को तैयार कर रहा है। हालिया सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो साल 2026 के 9% से थोड़ा अधिक है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत है कि कौन से सेक्टर ग्रोथ के लिए टैलेंट पर दांव लगा रहे हैं और कौन से कंपनियां बाजार की प्रतिस्पर्धा में दबाव झेल रही हैं।

कौन से सेक्टर मारेंगे बाजी?

NBFC सेक्टर में औसतन 10.1% की सैलरी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। पर्सनल और स्मॉल-बिजनेस लेंडिंग में तेजी के चलते ये कंपनियां क्रेडिट रिस्क और टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्स को लुभाने के लिए बड़ा बजट खर्च कर रही हैं। इसके बाद एनर्जी सेक्टर का नंबर आता है, जहां 9.9% की बढ़ोतरी अपेक्षित है। यहां इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडर्नाइजेशन और क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन के चलते स्पेशलाइज्ड इंजीनियरों की भारी डिमांड है।

निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर

टैलेंट को रोकने की इस कोशिश का एक दूसरा पहलू भी है। 18% का एट्रिशन रेट (कर्मचारियों के छोड़ने की दर) कंपनियों पर भारी पड़ रहा है, जिससे उन्हें प्रीमियम पैकेज देने पड़ रहे हैं। निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन सी कंपनियां इस खर्च को अपने मजबूत रेवेन्यू से संभाल सकती हैं, और कौन सी कर्ज या कम मार्जिन के कारण अपनी ऑपरेशनल एफिशिएंसी खो सकती हैं।

दूसरी ओर, टेक कंसल्टिंग और सर्विस इंडस्ट्री में सैलरी हाइक सबसे कम 6.6% रहने का अनुमान है। इसका कारण कंपनियों का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर शिफ्ट होना है। 56% भारतीय संगठनों ने 2026 में AI टूल का उपयोग बढ़ा दिया है, जिससे वे कम कर्मचारियों के साथ भी बेहतर काम कर पा रहे हैं।

अंत में, निवेशकों को नए 'वेज कोड' और अनुपालन खर्च (Compliance Costs) पर भी नजर रखनी होगी, जो कंपनियों के ओवरहेड्स को बढ़ा सकते हैं। भविष्य में सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कंपनियां इस बढ़ी हुई सैलरी लागत को ग्राहकों पर डाल पाती हैं या अपनी उत्पादकता (Productivity) बढ़ाकर मुनाफे को बचा पाती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.