भारत और सदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन (SACU) ने इम्पोर्ट ड्यूटी घटाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में दोनों के बीच व्यापार गिरकर **$15.56 बिलियन** पर आ गया था, जिसे सुधारने के लिए यह बातचीत बेहद अहम है।
व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
भारत और 5 देशों के समूह SACU ने 12 अगस्त को औपचारिक रूप से एक प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट (PTA) के लिए बातचीत शुरू की है। इसका मकसद इम्पोर्ट ड्यूटी को कम करना है ताकि दोनों ओर से कम होते व्यापारिक रिश्तों में सुधार लाया जा सके। गौरतलब है कि पिछला व्यापार आंकड़ा $18 बिलियन के आसपास था, जो घटकर अब $15.56 बिलियन रह गया है।
किन सेक्टरों पर रहेगी नजर?
इस यूनियन में साउथ अफ्रीका, बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और एस्वातिनी शामिल हैं। भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए यह एक बड़ा बाजार है। मुख्य रूप से फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल्स, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और मशीनरी जैसे सेक्टरों में भारत को भारी संभावना दिख रही है। ड्यूटी कम होने से भारतीय कंपनियों को ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिलेगी।
बातचीत की राह में चुनौतियां
हालांकि, इतिहास गवाह है कि 2002 से 2010 के बीच भी ट्रेड पैक्ट के कई प्रयास हुए, जो मार्केट एक्सेस और उत्पादों के दायरे को लेकर बनी असहमति के कारण सफल नहीं हो सके। इस बार दोनों पक्षों ने 1 साल के भीतर सहमति बनाने का लक्ष्य रखा है।
निवेशकों के लिए चिंता की एक बड़ी वजह ऑटोमोबाइल सेक्टर है। साउथ अफ्रीका द्वारा भारत और चीन से आने वाली गाड़ियों पर ड्यूटी 25% से बढ़ाकर 50% करने की खबरें चर्चा में हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय गाड़ियों की कीमत और कॉम्पिटिटिवनेस पर बुरा असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा?
वर्तमान में, बातचीत को 8 मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है, जिसमें कस्टम प्रोसीजर और रूल्स ऑफ ओरिजिन जैसे मुद्दे शामिल हैं। बाजार के जानकारों की नजर इस बात पर है कि क्या यह समझौता केवल गुड्स तक सीमित रहेगा या इसमें सर्विसेज को भी शामिल किया जाएगा।
