India-Russia Trade: $100 बिलियन के टारगेट पर नजर, ट्रेड डेफिसिट कम करने के लिए बनी नई रणनीति

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
India-Russia Trade: $100 बिलियन के टारगेट पर नजर, ट्रेड डेफिसिट कम करने के लिए बनी नई रणनीति

भारत और रूस के बीच ट्रेड डेफिसिट को कम करने और साल 2030 तक **$100 बिलियन** के व्यापार लक्ष्य को हासिल करने पर मंथन चल रहा है। नई दिल्ली में आयोजित INNOPROM एग्जीबिशन के दौरान दोनों देशों के मंत्री पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।

व्यापार संतुलन और एक्सपोर्ट पर जोर

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और रूसी व्यापार मंत्री एंटोन अलीखानोव के बीच नई दिल्ली में अहम बैठक हुई है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र भारत द्वारा रूस से किए जा रहे बड़े पैमाने पर एनर्जी इंपोर्ट के कारण पैदा हुए ट्रेड असंतुलन को ठीक करना है। अब सरकार फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर सेक्टर में अपने एक्सपोर्ट को बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि दोनों देशों के बीच व्यापार का प्रवाह ज्यादा संतुलित और टिकाऊ बन सके।

पेमेंट सिस्टम और औद्योगिक तालमेल

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि दोनों देश थर्ड-पार्टी बैंकिंग सिस्टम पर अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय से पेमेंट में आ रही देरी और ट्रांजैक्शन की समस्याओं को दूर करने के लिए नई पेमेंट मैकेनिज्म और जॉइंट वेंचर्स पर काम किया जा रहा है। इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जो अपनी सप्लाई चेन के लिए भरोसेमंद क्रॉस-बॉर्डर सेटलमेंट पर निर्भर हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स और PSU का रोल

भारत की लंबी अवधि की मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी ट्रांजिशन योजनाओं को देखते हुए क्रिटिकल मिनरल्स पर ध्यान दिया जा रहा है। Steel Authority of India (SAIL) और NMDC जैसी भारतीय कंपनियां रूस के साथ मिलकर कोकिंग कोल और निकेल जैसी सामग्री हासिल करने पर काम कर रही हैं। ये संसाधन भारत के स्टील प्रोडक्शन और इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी इकोसिस्टम के लिए बेहद जरूरी हैं।

चुनौतियां और भविष्य की राह

हालांकि, राह आसान नहीं है। रूस पर लगे वैश्विक प्रतिबंधों के कारण जॉइंट वेंचर्स में लॉजिस्टिक और फाइनेंशियल मुश्किलें आ सकती हैं। इसके अलावा, कच्चे खनिजों की प्रोसेसिंग के लिए बड़े पैमाने पर कैपिटल इन्वेस्टमेंट और तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत है। निवेशकों को यह देखना होगा कि कितनी तेजी से दोनों देश पेमेंट सिस्टम को सरल बनाते हैं और इन माइनिंग प्रोजेक्ट्स को जमीनी स्तर पर उतारते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.