सरकार ने ITIs के कायाकल्प के लिए ₹60,000 करोड़ का PM-SETU प्लान लॉन्च किया है। इसमें 1,000 ITIs की कमान प्राइवेट सेक्टर के हाथों में होगी, जिसे **51%** हिस्सेदारी दी जाएगी।
भारत सरकार ने स्किलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने के लिए Pradhan Mantri Skilling and Employability Transformation through Upgraded ITIs (PM-SETU) की शुरुआत की है। इस ₹60,000 करोड़ के महत्वाकांक्षी प्रोग्राम के जरिए 200 हब और 800 स्पोक ITIs को आधुनिक बनाया जाएगा ताकि मैन्युफैक्चरिंग और एनर्जी सेक्टर की जरूरतों को पूरा किया जा सके।
प्राइवेट सेक्टर की बड़ी भूमिका
इस बार सरकार ने मैनेजमेंट का कंट्रोल प्राइवेट प्लेयर्स को सौंपने का फैसला किया है। Special Purpose Vehicles (SPVs) के जरिए कंपनियों को 51% हिस्सेदारी दी जा रही है। इसका मकसद साफ है—करिकुलम डिजाइन और लैब की तकनीक वैसी ही हो, जैसी आज इंडस्ट्री की मांग है। यह केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सीधे रोजगार से जुड़ा एक मॉडल है।
फंडिंग और CSR का तड़का
फंडिंग के मोर्चे पर, सरकार मुख्य पूंजी तो लगाएगी ही, लेकिन प्राइवेट पार्टनर को 17% लागत उठानी होगी। अच्छी बात यह है कि कंपनियां इस खर्च को अपने CSR फंड से पूरा कर सकती हैं। यह कंपनियों के लिए अपने सप्लाई चेन में कुशल टैलेंट तैयार करने का एक सुनहरा मौका है।
क्या हैं चुनौतियां?
इस पूरी योजना की सफलता SPVs के गठन पर टिकी है। केंद्र और राज्य सरकारों के साथ प्राइवेट सेक्टर का तालमेल बिठाना आसान नहीं होगा। अगर ब्यूरोक्रेटिक अड़चनें आईं या कंपनियों का उत्साह कम हुआ, तो प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। फिलहाल, NCVET और सेक्टर स्किल काउंसिल के जरिए सर्टिफिकेशन को स्टैंडर्डाइज किया जा रहा है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहनी चाहिए।
