सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए अपनी Bilateral Investment Treaty रूपरेखा को अपडेट करने का फैसला किया है। नए ड्राफ्ट में **5 साल** की कानूनी बाध्यता को कम करने और टैक्स नीतियों को स्पष्ट करने पर जोर दिया गया है।
कानूनी अड़चनों को कम करने की कवायद
वित्त मंत्रालय ने नए इन्वेस्टमेंट ट्रीटी फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जो अब कैबिनेट सचिवालय के पास विचार के लिए है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत को ग्लोबल मानकों के साथ जोड़ना है। वर्तमान में, 2016 से लागू नियमों के तहत विदेशी निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन (Arbitration) में जाने से पहले स्थानीय अदालतों में 5 साल तक इंतजार करना पड़ता था। इस नई योजना में इस समयसीमा को घटाकर 1 से 2 साल किए जाने की उम्मीद है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
टैक्स पॉलिसी पर स्पष्टता
टैक्सेशन हमेशा से निवेश संधियों का सबसे जटिल हिस्सा रहा है। सरकार चाहती है कि टैक्स के मामलों में उसका पूर्ण संप्रभु अधिकार बना रहे, लेकिन साथ ही विदेशी कंपनियों के लिए पॉलिसी में स्थिरता सुनिश्चित की जाए। इस नए फ्रेमवर्क के जरिए सरकार ऐसी भाषा तैयार करने की कोशिश कर रही है, जिससे निवेशकों को अचानक होने वाले नीतिगत बदलावों का डर न सताए।
FDI के लिए नया विजन
भारत के बढ़ते औद्योगिक विकास और मजबूत बैंकिंग क्रेडिट के बीच, यह बदलाव ग्लोबल कैपिटल को आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का यह कदम ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों के साथ नई संधियों को अंतिम रूप देने में भी मददगार साबित होगा। निवेशकों के लिए यह 'Ease of Doing Business' की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
