Deep-tech स्टार्टअप्स के लिए सरकार अपने फंडिंग नियमों को अपडेट कर रही है। परंपरागत सॉफ्टवेयर आधारित मेट्रिक्स के बजाय, अब क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स की वैल्यूएशन और गवर्नेंस पर ध्यान दिया जाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
भारत सरकार अब डीप-टेक (Deep-tech) स्टार्टअप्स के मूल्यांकन के तरीके में बदलाव करने की तैयारी में है। अब तक सॉफ्टवेयर कंपनियों को शॉर्ट-टर्म रेवेन्यू और तिमाही ग्रोथ (Quarterly Growth) के आधार पर आंका जाता था, लेकिन सेमीकंडक्टर, क्वांटम कंप्यूटिंग और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में प्रोडक्ट तैयार होने में सालों का समय लगता है। इन स्टार्टअप्स पर पारंपरिक ई-कॉमर्स मेट्रिक्स थोपना गलत साबित हो रहा है।
सरकार की नई पहल और राहत
इस गैप को भरने के लिए, सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का 'रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन स्कीम' लॉन्च किया है, जो 6 साल तक के हाई-रिस्क प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करेगा। इसके अलावा, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने 15 साल तक की रीपेमेंट अवधि वाले कोलेटरल-फ्री लोन (Collateral-free loans) की शुरुआत की है। यह बदलाव साफ करता है कि डीप-टेक को 'पेशेंट कैपिटल' (Patient Capital) की जरूरत है, न कि जल्दबाजी में रेवेन्यू टारगेट पूरा करने के दबाव की।
पारदर्शिता और गवर्नेंस पर जोर
'Startup India Fund of Funds 2.0' के जरिए बाजार में आ रहे भारी फंड के बीच, सरकार पारदर्शिता को लेकर भी सख्त है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी पूंजी आने से 'इंस्टीट्यूशनल क्रोनिज्म' (Institutional cronyism) का खतरा बढ़ सकता है, जहाँ मेरिट के बजाय जान-पहचान को प्राथमिकता मिल सकती है।
इसे रोकने के लिए अब कड़े 'कॉन्फ्लिक्ट-ऑफ-इंटरेस्ट' नियम लाए जा रहे हैं। अब इवैल्यूएटर्स को अपने पिछले एडवाइजरी रोल, बोर्ड पोजीशन और निवेश की जानकारी देनी होगी। अगर किसी का कंपनी से संबंध है, तो उन्हें फैसला लेने की प्रक्रिया से खुद को अलग करना होगा।
इवैल्यूएशन प्रोसेस में बड़ा बदलाव
सरकार अब इवैल्यूएशन पैनल को बार-बार रोटेट करने की योजना बना रही है ताकि कोई एक ग्रुप हावी न हो सके। इसके अलावा, टेक्निकल असेसमेंट को कमर्शियल इवैल्यूएशन से अलग किया जाएगा। यानी वैज्ञानिक तकनीकी व्यवहार्यता (Technical feasibility) जांचेंगे और निवेश प्रोफेशनल बिजनेस वायबिलिटी देखेंगे। इस नई गवर्नेंस का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि निवेश के फैसले डाटा पर आधारित हों, न कि व्यक्तिगत संबंधों पर।
