देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने डेटा सेंटर को दी जाने वाली भारी सब्सिडी पर चिंता जताई है। अब Niti Aayog इन निवेशों के लिए एक सख्त फ्रेमवर्क ला रहा है ताकि टैक्सपेयर्स और बिजली ग्रिड को किसी भी बड़े वित्तीय जोखिम से बचाया जा सके।
भारत सरकार अब डेटा सेंटर्स को आकर्षित करने के लिए दी जाने वाली रियायतों पर नए सिरे से विचार कर रही है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने चेतावनी दी है कि राज्यों के बीच बिजली ड्यूटी में छूट और जमीन आवंटन को लेकर चल रही होड़ से भविष्य में बड़ा वित्तीय संकट पैदा हो सकता है। यह चिंता तब और बढ़ जाती है जब इन रियायतों का लाभ उठाने वाले प्रोजेक्ट्स स्थानीय अर्थव्यवस्था में लंबे समय तक योगदान नहीं देते।
बुनियादी ढांचों का बढ़ता रिस्क
डेटा सेंटर बिजनेस मॉडल में हार्डवेयर की उम्र अक्सर केवल 6 साल के आसपास होती है। अगर कोई कंपनी कम समय के लिए लीज पर काम करती है, तो सब्सिडी का बोझ सरकारी खजाने और स्थानीय बिजली वितरण कंपनियों पर पड़ सकता है। इसके अलावा, इन केंद्रों में बहुत कम स्थायी नौकरियां निकलती हैं, जिससे सरकार को मिलने वाला आर्थिक लाभ उम्मीद से कम रहता है।
Niti Aayog का नया रोडमैप
इस स्थिति को सुधारने के लिए Niti Aayog एक नया 'इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क' तैयार कर रहा है। इसके तहत:
- राज्यों को केवल निवेश के वादों के बजाय इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी पर जोर देना होगा।
- ग्रिड अपग्रेड के खर्च को अब सीधे प्रोजेक्ट्स से ही वसूला जाएगा।
- सब्सिडी अब केवल प्रमाणित 'माइलस्टोन्स' और ठोस नतीजों के आधार पर ही मिलेगी।
इसका सीधा असर डेवलपर्स और निवेशकों पर पड़ेगा। भविष्य के समझौतों में 'मिनिमम ऑफटेक गारंटी' और लागत आधारित टैरिफ जैसे क्लॉज अनिवार्य हो सकते हैं। इससे अब डेटा सेंटर के लिए सिर्फ सरकारी सब्सिडी नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट की लंबी अवधि की व्यावहारिकता (Viability) ज्यादा मायने रखेगी।
