साल 2021 के बाद से भारत में रिटेल और MSME ग्राहकों को मिलने वाले लोन में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। लेकिन अब बैंक कुछ सावधान हो गए हैं क्योंकि लोन चुकाने में जोखिम बढ़ रहा है और लोन की रफ़्तार धीमी हो गई है।
पिछले 5 सालों में क्या बदला?
पिछले पांच सालों में भारत के फॉर्मल क्रेडिट सिस्टम में बड़ा बदलाव आया है। बैंकिंग सिस्टम में लाखों नए कर्जदार जुड़े हैं। अगस्त 2026 तक, रिटेल क्रेडिट की पहुंच 78.9 करोड़ कर्जदारों तक पहुंच गई, जो 2021 में सिर्फ 45.5 करोड़ थी।
MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर में भी काफी हलचल देखी गई। एक्टिव कर्जदारों की संख्या दोगुनी होकर 1.9 करोड़ हो गई, जो पहले 0.9 करोड़ थी।
लोन ग्रोथ में आई कमी, क्या है वजह?
यह बड़ी बढ़ोतरी इकोनॉमी के और ज्यादा फॉर्मल होने का संकेत है। लेकिन, अब तस्वीर बदलती दिख रही है। कर्जदारों तक पहुंच तो बढ़ी है, लेकिन बैंक अब लोन देने की रफ़्तार धीमी कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, अप्रैल 2026 में MSME लोन ग्रोथ सालाना 12.7% रहा, जो पिछले क्वार्टर में 18% से 20% की ग्रोथ से काफी कम है।
यह कमी बैंकों की रणनीति में बदलाव दिखाती है। लेंडर्स अब ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं क्योंकि उन्हें वित्तीय दबाव का खतरा बढ़ रहा है। खास तौर पर, बिना गारंटी वाले लोन (Unsecured Loans) में दिक्कतें बढ़ रही हैं, जहाँ किस्तें चूकने के मामले बढ़ रहे हैं। इस वजह से, बैंक अब आक्रामक तरीके से लोन बढ़ाने के बजाय एसेट क्वालिटी (Loan Books) और रिस्क मैनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं।
अभी भी है क्रेडिट गैप
इतनी बड़ी पहुंच के बावजूद, अभी भी एक बड़ा क्रेडिट गैप बाकी है। मार्च 2026 तक, करीब 41% रजिस्टर्ड MSMEs को ही फॉर्मल बैंकिंग क्रेडिट मिल पा रहा था। यह गैप, और पहली बार लोन लेने वालों का छोटे-छोटे अनसिक्योर्ड लोन पर निर्भर होना, बैंकिंग सेक्टर के लिए एक मुश्किल स्थिति पैदा करता है। इस तरह के लोन में प्रॉपर्टी या एसेट्स के बदले लिए गए लोन की तुलना में डिफॉल्ट का खतरा ज्यादा होता है।
आगे क्या होगा?
अब निवेशकों और एनालिस्टों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक इस बदलते माहौल में अपने लोन पोर्टफोलियो को कैसे मैनेज करते हैं। यह देखना अहम होगा कि क्रेडिट स्टैंडर्ड और टाइट होते हैं या नहीं, और इसका नए लोन की कुल मात्रा पर क्या असर पड़ता है। निवेशक बैंकिंग सेक्टर की सेहत को समझने के लिए बैड लोन (Bad Loans) जैसे एसेट क्वालिटी मेट्रिक्स पर भी नजर रखेंगे।
