India Reservoir Storage: मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, रिजर्वोयर में पानी का स्तर **68%** पर सिमटा

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AuthorNeha Patil|Published at:
India Reservoir Storage: मानसून की बेरुखी से बढ़ी चिंता, रिजर्वोयर में पानी का स्तर **68%** पर सिमटा

भारत के **166** प्रमुख बांधों में पानी का स्तर फिलहाल **68%** है, लेकिन मानसून में **13%** की कमी ने बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। यह कमी रबी की फसल, हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर और फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) के लिए बड़ा रिस्क बन सकती है।

सेंट्रल वाटर कमीशन (Central Water Commission) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के 166 प्रमुख बांधों में कुल क्षमता का 68% पानी ही बचा है। हालांकि यह आंकड़ा सीजन की शुरुआत से तो बेहतर है, लेकिन पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 18% कम है। इतना ही नहीं, यह 10 साल के औसत से भी नीचे चल रहा है। इस स्थिति के पीछे मुख्य वजह जून से अगस्त के बीच मानसून की बारिश में आई 13% की कमी है।

कृषि और महंगाई पर असर (Agriculture & Inflation)

रबी फसल की बुवाई के लिए पानी की उपलब्धता एक बड़ा फैक्टर है। पानी की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जो आगे चलकर फूड इन्फ्लेशन को हवा दे सकती है। निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि फर्टिलाइजर, ट्रैक्टर और FMCG कंपनियों पर इसका दबाव दिख सकता है, क्योंकि ग्रामीण इलाकों में खर्च करने की क्षमता कम हो सकती है।

पावर सेक्टर की चुनौतियां

भारत की एक बड़ी ऊर्जा निर्भरता हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर पर है। जलाशयों में पानी कम होने से बिजली उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे पावर कंपनियों और भारी उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। स्थिति पूरे देश में एक जैसी नहीं है; दक्षिण और पूर्वी भारत में मानसून की कमी सबसे ज्यादा गंभीर है।

आगे का रास्ता (Future Outlook)

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, 'अल नीनो' (El Niño) के असर पर बारीक नजर रखी जा रही है, जो बारिश को और सीमित कर सकता है। अगर यह कमी जारी रही, तो सिंचाई और औद्योगिक उपयोग के लिए पानी की किल्लत बढ़ना तय है। अब बाजार की नजरें रबी सीजन की बुवाई और इन्फ्लेशन के डेटा पर टिकी हैं, जो भविष्य में रूरल डिमांड को तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.