देश के प्रमुख जलाशयों में पानी का स्तर घटकर **68.6%** रह गया है, जबकि दक्षिण भारत के राज्यों में यह स्थिति **45%** से भी नीचे पहुंच गई है। यह कमी हाइड्रोपावर, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।
सेंट्रल वाटर कमिशन (Central Water Commission) के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 178 बड़े जलाशयों में कुल जल भंडारण 126.7 बिलियन क्यूबिक मीटर तक आ गया है, जो उनकी कुल क्षमता का 68.6% है। हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अभी स्थिर है, लेकिन क्षेत्रीय आधार पर तस्वीर चिंताजनक है। पश्चिमी और मध्य भारत में तो पानी का स्तर 80% से ऊपर है, लेकिन दक्षिण भारत में पानी की किल्लत 45% के स्तर को भी पार कर गई है।\n\n### किन क्षेत्रों पर होगा असर?\n\nदक्षिण भारत में मौजूद जलाशयों जैसे आंध्र प्रदेश के Somasila और Kandaleru, और तमिलनाडु के Mettur, Vaigai और Aliyar में पानी का स्तर लगातार कम हो रहा है। इसके कई गहरे आर्थिक परिणाम हो सकते हैं:\n\n* हाइड्रोपावर: बिजली उत्पादन करने वाली कंपनियों की आउटपुट पर असर पड़ सकता है।\n* कृषि और FMCG: फसलों की पैदावार प्रभावित होने से कच्चे माल की लागत (Raw material cost) बढ़ सकती है, जिसका असर खाद्य प्रसंस्करण (Food processing) कंपनियों के मार्जिन पर होगा।\n* मैन्युफैक्चरिंग: पानी की कमी वाले इलाकों में यदि स्थानीय प्रशासन उपयोग पर रोक लगाता है, तो फैक्ट्रियों के संचालन में दिक्कतें आ सकती हैं।\n\nअब निवेशकों की निगाहें नॉर्थ-ईस्ट मानसून पर टिकी हैं। मौसम विभाग का अनुमान है कि तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और ओडिशा में अच्छी बारिश हो सकती है, जिससे इन जलाशयों में पानी का इनफ्लो सुधरने की उम्मीद है। मार्केट एक्सपर्ट्स सेंट्रल वाटर कमिशन की साप्ताहिक रिपोर्ट पर बारीक नजर बनाए हुए हैं।
