देश के जलाशयों में पानी का स्तर घटकर **71.84%** रह गया है, जो ऐतिहासिक औसत से काफी कम है। दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में सूखे के चलते अब रबी सीजन की फसल और ग्रामीण खपत (Rural Demand) पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जो महंगाई को भी हवा दे सकता है।
देश में मानसून की 12% कमी के कारण जलाशयों का स्तर लुढ़ककर 71.84% के निचले स्तर पर आ गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में भंडारण में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
महाराष्ट्र में सूखे का अलर्ट
महाराष्ट्र सरकार ने 265 तहसीलों में सूखा घोषित कर दिया है और 16 अक्टूबर से गैर-जरूरी कार्यों के लिए पानी की खपत में 10% की कटौती अनिवार्य कर दी है। मिट्टी में नमी की कमी अब रबी सीजन की बुवाई के लिए बड़ा खतरा बन रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर मार
इसका सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ेगा जिनकी निर्भरता ग्रामीण बाजार पर है। ट्रैक्टर, टू-व्हीलर, फर्टिलाइजर और ग्रामीण क्षेत्रों पर केंद्रित FMCG सेक्टर की कंपनियों के वॉल्यूम ग्रोथ में सुस्ती आ सकती है। किसानों की आय प्रभावित होने से विवेकाधीन खर्च (Discretionary Spending) में कमी आने की पूरी संभावना है।
महंगाई और बैंकों पर दबाव
खाद्यान्न उत्पादन में कमी से दालों, तिलहन और अनाज की सप्लाई प्रभावित होगी, जिससे फूड इन्फ्लेशन का दबाव बढ़ सकता है। केंद्रीय बैंक के लिए ग्रोथ और महंगाई के बीच संतुलन बनाना मुश्किल होगा। इसके अलावा, जिन बैंकों और NBFC का कृषि लोन पोर्टफोलियो बड़ा है, उन्हें NPA (Non-Performing Assets) बढ़ने का डर सता रहा है।
पावर सेक्टर की चुनौतियां
जलाशयों का स्तर कम होने से हाइड्रोपावर प्लांट से बिजली उत्पादन कम हो गया है। इसके चलते थर्मल पावर पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे औद्योगिक बिजली दरों (Industrial Tariffs) में इजाफा हो सकता है और ऑपरेशनल कॉस्ट बढ़ सकती है।
