भारत और सऊदी अरब के बीच नई निवेश संधि के तहत अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन के लिए अनिवार्य स्थानीय कानूनी प्रतीक्षा अवधि को **5 साल** से घटाकर अब **2 साल** कर दिया गया है।
विदेशी निवेश को मिलेगी रफ्तार
भारत सरकार ने अपनी इनवेस्टमेंट पॉलिसी में बड़ा बदलाव किया है। इस नई संधि के बाद, विदेशी निवेशकों को किसी भी विवाद की स्थिति में अब केवल 2 साल तक ही स्थानीय अदालतों में कानूनी प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। पहले यह समय सीमा 5 साल की थी। सरकार का यह कदम विदेशी निवेशकों के भरोसे को जीतने और बड़ी पूंजी को भारत लाने के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित हो सकता है।
ऊर्जा क्षेत्र पर खास नजर
इस नीति का सबसे बड़ा फायदा एनर्जी सेक्टर को मिलने की उम्मीद है। सऊदी की दिग्गज कंपनी Saudi Aramco पहले से ही BPCL और ONGC के रिफाइनरी प्रोजेक्ट्स में 26% तक की हिस्सेदारी लेने की संभावना तलाश रही है। लंबे समय से ये प्रोजेक्ट्स कानूनी पेचीदगियों के कारण अटके हुए थे, लेकिन अब इस कानूनी राहत से इन डील के जल्द परवान चढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
आगे की रणनीति
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संकेत दिए हैं कि सरकार इसी तरह की सुरक्षा संधियां कनाडा और रूस जैसे देशों के साथ भी करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इस साल के अंत तक कई बड़े समझौते फाइनल हो सकते हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि निवेशकों को अभी भी प्रोजेक्ट फाइनेंसिंग और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कारकों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। सरकार का ध्यान अब विदेशी पूंजी लाने के साथ-साथ घरेलू नियामक ढांचे को और भी अधिक आधुनिक और लचीला बनाने पर है।
