Trade Policy: भारत का बड़ा फैसला, GM फूड और डेयरी इंपोर्ट को लेकर सरकार ने खींची 'रेड लाइन'

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AuthorAditya Rao|Published at:
Trade Policy: भारत का बड़ा फैसला, GM फूड और डेयरी इंपोर्ट को लेकर सरकार ने खींची 'रेड लाइन'

कॉमर्स मिनिस्टर Piyush Goyal ने साफ कर दिया है कि ट्रेड डील्स में भारत न तो जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) प्रोडक्ट्स को एंट्री देगा और न ही विदेशी डेयरी उत्पादों पर कोई ड्यूटी रियायत देगा।

कॉमर्स और इंडस्ट्री मिनिस्टर Piyush Goyal ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की किसी भी ट्रेड डील में भारत अपने कृषि और खाद्य सुरक्षा से समझौता नहीं करेगा। सरकार का फोकस घरेलू डेयरी सेक्टर को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है, जो कि छोटे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक संवेदनशील मुद्दा है।

धार्मिक और आर्थिक भावनाएं

इस फैसले के पीछे सिर्फ आर्थिक कारण ही नहीं, बल्कि धार्मिक संवेदनाएं भी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई डेयरी उत्पादों और पनीर के निर्माण में 'रेनेट' (Rennet) का इस्तेमाल होता है, जो जानवरों से प्राप्त होता है। भारतीय मानकों और धार्मिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन उत्पादों पर सख्त सर्टिफिकेशन नियम लागू रखे हैं।

ट्रेड नेगोशिएशन्स पर असर

इस सख्त रुख का सीधा असर अमेरिका जैसे देशों के साथ चल रही ट्रेड बातचीत पर पड़ सकता है, जो भारत के विशाल बाजार में अपने कृषि और डेयरी उत्पादों की पहुंच चाहते हैं। हालांकि, सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।

वहीं दूसरी ओर, भारत अपनी निर्यात रणनीति को आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है। सरकार टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, और जेम्स एंड ज्वेलरी जैसे सेक्टरों में बेहतर मार्केट एक्सेस की मांग कर रही है ताकि इंडोनेशिया, वियतनाम और चीन जैसे देशों के मुकाबले भारतीय सामान को ग्लोबल लेवल पर फायदा मिल सके।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इन्वेस्टर्स को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि यह सुरक्षात्मक रुख ट्रेड डील्स के पूरा होने में कितनी देरी लाता है। हालांकि सरकार का इरादा स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है, लेकिन ज्यादा सख्त नियम कभी-कभी ट्रेड पार्टनर्स के साथ कूटनीतिक तनाव या जवाबी कार्रवाई का जोखिम भी पैदा कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.