SEMICON India 2026 में सरकार ने अपनी चिप रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब पूरा सप्लाई चेन भारत में बनाने के बजाय, सरकार डिजाइन और पैकेजिंग जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर जोर दे रही है ताकि ग्लोबल पार्टनर्स को आकर्षित किया जा सके।
फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिस्री ने SEMICON India 2026 में स्पष्ट किया है कि भारत अब चिप उद्योग के लिए अपनी रणनीति बदल रहा है। अब लक्ष्य पूरी सप्लाई चेन को स्थानीय बनाने के बजाय, उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करना है जहां भारत को ग्लोबल कॉम्पिटिटिव एज (Competitive Edge) मिल सके। इसमें चिप डिजाइन, एडवांस्ड पैकेजिंग और चुनिंदा फैब्रिकेशन प्रक्रियाएं शामिल हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चिप निर्माण का पूरा इकोसिस्टम एक ही देश में तैयार करना बेहद खर्चीला और तकनीकी रूप से जटिल है। सरकार अब भारत को ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में जोड़ना चाहती है। इससे न केवल विदेशी कंपनियों के साथ तालमेल बढ़ेगा, बल्कि भारत के बड़े इंजीनियर पूल का भी बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा। सरकार का मानना है कि भारत की लोकतांत्रिक स्थिरता और बढ़ती मांग ग्लोबल टेक कंपनियों के लिए एक मजबूत सेलिंग पॉइंट है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
इस नीति से देश की कई बड़ी कंपनियों को नई दिशा मिली है:
- Kaynes Technology: कंपनी असेंबली और टेस्टिंग (OSAT) की क्षमता बढ़ा रही है।
- Tata Electronics: फैब्रिकेशन और असेंबली पर बड़ा दांव लगा रही है।
- Dixon Technologies: इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज में कंपोनेंट्स को शामिल कर रही है।
सेक्टर के सामने रिस्क (Risk Factors)
निवेशकों को यह समझना होगा कि सेमीकंडक्टर सेक्टर में कैपिटल एक्सपेंडिचर (CapEx) बहुत अधिक होता है और मुनाफा आने में लंबा समय लगता है। कंपनियां अक्सर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए ग्लोबल पार्टनर्स पर निर्भर रहती हैं। इसलिए, डेट लेवल (Debt levels) और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की निरंतरता पर नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी है। भविष्य में सरकार से मिलने वाले इंसेंटिव्स और नए प्रोजेक्ट्स के कमीशनिंग डेट्स ही इन कंपनियों की सफलता की कहानी तय करेंगे।
