भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक नई मिसाल कायम की है। देश ने लगातार 5 सालों से **7%** से ज्यादा की सालाना GDP ग्रोथ दर्ज की है, और फाइनेंशियल ईयर 2027 तक नॉमिनल GDP **$4.15 ट्रिलियन** तक पहुँचने का अनुमान है।
भारत ने आधिकारिक तौर पर आर्थिक विस्तार के 5 साल पूरे कर लिए हैं, जिसमें हर साल 7% से ज्यादा की ग्रोथ देखी गई है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि आज का भारतीय बाजार दो दशक पहले की तुलना में कहीं बड़ा है, जब अर्थव्यवस्था का आकार लगभग $1 ट्रिलियन था। अब $4.15 ट्रिलियन के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए, यह विकास देश के औद्योगिक आधार में आए बड़े बदलाव को दर्शाता है।\n\n### ग्लोबल चुनौतियों के बावजूद मजबूती\n\nदुनिया भर में जारी अनिश्चितता और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भारतीय इकॉनमी ने अपना दम दिखाया है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख तेल शिपिंग मार्गों पर बढ़ते तनाव और क्रूड ऑयल की कीमतों में उठा-पटक के बावजूद, घरेलू बाजार ने पहले के चक्रों की तुलना में कहीं ज्यादा मजबूती दिखाई है।\n\n### ग्रोथ के पीछे के 'इंजन'\n\nइस आर्थिक स्थिरता के पीछे सरकार की ठोस नीतियां और Reserve Bank of India का बेहतरीन मॉनिटरी मैनेजमेंट मुख्य वजह माना जा रहा है। Production Linked Incentive (PLI) स्कीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई जान फूंकी है, जिससे भारत ग्लोबल एक्सपोर्ट मार्केट में पहले से कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी बना है। इसके अलावा, UK और European Union के साथ नए ट्रेड समझौतों की कवायद घरेलू उद्योगों को ग्लोबल ट्रेड पॉलिसी के अचानक होने वाले बदलावों से बचाने के लिए की जा रही है।\n\nनिवेशकों के लिए अब फोकस इस बात पर है कि यह स्ट्रक्चरल ग्रोथ कंपनियों की कमाई में किस तरह तब्दील होती है। हालांकि आउटलुक स्थिर दिख रहा है, लेकिन एनर्जी सप्लाई पर निर्भरता जैसे जोखिमों पर बारीकी से नजर रखना जरूरी होगा।
