स्कॉच व्हिस्की (Scotch whisky) के इम्पोर्ट पर ड्यूटी को लेकर चल रहे विवाद को सरकार ने सुलझा लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ट्रेड एग्रीमेंट के तहत दी गई रियायतें बनी रहेंगी, जिससे इम्पोर्ट टैक्स के **150%** तक बढ़ने का खतरा टल गया है।
विवाद की जड़ और समाधान
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने 2 नवंबर, 2026 को इंडस्ट्री लीडर्स के साथ बैठक के बाद स्कॉच व्हिस्की की इम्पोर्ट ड्यूटी को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भरोसा दिलाया है कि सरकार भारत-यूके ट्रेड एग्रीमेंट (India-UK trade agreement) के तहत तय की गई रियायतों का पूरी तरह सम्मान करेगी।
क्या था पूरा मामला?
विवाद की शुरुआत तब हुई जब डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने बल्क स्कॉच व्हिस्की पर इस्तेमाल होने वाले HSN कोड्स पर सवाल उठाए थे। अधिकारी इस बात की जांच कर रहे थे कि क्या स्कॉच को पारंपरिक 'स्पिरिट्स कैटेगरी' (कोड 2208) से हटाकर 'अनस्पेसिफाइड फूड प्रिपरेशन' (कोड 2106) में डाल दिया जाए। अगर ऐसा होता, तो टैक्स रेट सीधे 75% से उछलकर 150% हो जाता। बता दें कि भारत आने वाली कुल यूके व्हिस्की का 80% हिस्सा बल्क में आता है, इसलिए यह फैसला कंपनियों के लिए बड़ा झटका हो सकता था।
कंपनियों पर असर
यह निर्णय Diageo, Pernod Ricard, Radico Khaitan, और Allied Blenders & Distillers जैसी बड़ी शराब कंपनियों के लिए संजीवनी की तरह है। ये कंपनियां स्थानीय स्तर पर ब्लेंडिंग और बॉटलिंग के लिए भारी मात्रा में स्कॉच इम्पोर्ट करती हैं। मार्जिन के दबाव के बीच टैक्स का दोगुना होना इन फर्मों के मुनाफे पर सीधा असर डाल सकता था।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
हालांकि सरकार ने फिलहाल टैक्स बढ़ने का खतरा टाल दिया है, लेकिन निवेशकों को अब आधिकारिक कस्टम्स सर्कुलर का इंतज़ार करना चाहिए। जब तक सरकारी नोटिफिकेशन जारी नहीं होता, तब तक रेगुलेटरी स्तर पर बारीकियों पर नजर बनाए रखना जरूरी है, ताकि प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन न आए।
