Global Innovation Index 2026: भारत का दबदबा बरकरार, पर R&D के मोर्चे पर अभी भी चुनौतियां जारी

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AuthorAditya Rao|Published at:
Global Innovation Index 2026: भारत का दबदबा बरकरार, पर R&D के मोर्चे पर अभी भी चुनौतियां जारी

Global Innovation Index 2026 में भारत ने अपनी **38वीं** रैंक बरकरार रखी है। लोअर-मिडल इनकम वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत अभी भी टॉप पर है, लेकिन रिसर्च और डेवलपमेंट में कम निवेश चिंता का विषय बना हुआ है।

World Intellectual Property Organization द्वारा जारी किए गए Global Innovation Index (GII) 2026 में भारत ने लगातार 16वें साल 'इनोवेशन ओवरपरफॉर्मर' का खिताब हासिल किया है। इसका मतलब है कि देश अपनी आर्थिक क्षमता से कहीं बेहतर इनोवेशन परिणाम दे रहा है।

इनोवेशन आउटपुट बनाम इनपुट

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का प्रदर्शन 'इनोवेशन आउटपुट' के मामले में शानदार रहा है, जहां देश 25वीं रैंक पर है। इसकी बड़ी वजह ICT सर्विसेज़ का एक्सपोर्ट और वेंचर कैपिटल में मिली 4थी रैंक है। हालांकि, 'इनोवेशन इनपुट' में भारत 49वें पायदान पर है, जो दर्शाता है कि सीमित संसाधनों का इस्तेमाल करके हम नतीजे तो निकाल रहे हैं, लेकिन इकोसिस्टम का आधार अभी भी कमजोर है।

लंबी अवधि के लिए स्ट्रक्चरल चुनौतियां

इन्वेस्टर्स के लिए यह ध्यान रखना जरूरी है कि भारत 'बिजनेस सोफिस्टिकेशन' में 63वीं और 'इंफ्रास्ट्रक्चर' में 62वीं रैंक पर है। सबसे बड़ी चिंता 0.6% GDP का रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर खर्च होना है, जो ग्लोबल लीडर्स की तुलना में काफी कम है। इसके अलावा, प्रति मिलियन लोगों पर रिसर्चर्स की कमी भी एक बड़ी बाधा है।

अब आगे क्या?

भारत का इनोवेशन अभी भी काफी हद तक बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे चुनिंदा शहरों और डिजिटल सेक्टर तक ही सीमित है। अगर भारत को अगली स्तर की प्रतिस्पर्धा हासिल करनी है, तो मैन्युफैक्चरिंग और एग्रीकल्चर जैसे कोर सेक्टरों में टेक्नोलॉजी के एडॉप्शन को बढ़ाना होगा। आने वाले समय में सरकार और प्राइवेट सेक्टर का रिसर्च पर खर्च ही यह तय करेगा कि भारत अपनी इस ग्रोथ को कितना सस्टेनेबल बना पाता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.