World Economic Forum की ताजा रिपोर्ट में भारत 145 देशों में से 131वें नंबर पर बना हुआ है। शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन राजनीतिक और लेबर मार्केट में महिलाओं की भागीदारी अब भी चिंता का विषय बनी हुई है।
World Economic Forum (WEF) की 2026 Global Gender Gap Report के आंकड़े सामने आए हैं, जिसमें भारत की स्थिति जस की तस बनी हुई है। देश ने अब तक कुल जेंडर गैप का 64.5% हिस्सा ही भरा है, और इसमें कोई भी सुधार न होना इस बात का संकेत है कि बदलाव की रफ्तार काफी धीमी है। हालांकि यह रिपोर्ट मुख्य रूप से सामाजिक और राजनीतिक आंकड़ों पर आधारित है, लेकिन निवेशकों के लिए यह देश की लॉन्ग-टर्म इकोनॉमिक ग्रोथ की क्षमता को समझने का एक बड़ा पैमाना है।\n\n### शिक्षा में दम, लेकिन भागीदारी में कमी\n\nरिपोर्ट में एक बड़ा विरोधाभास देखने को मिला है। भारत ने शैक्षिक उपलब्धियों (Educational Attainment) में 96.6% का गैप भर लिया है, जो बताता है कि हमारे पास एक स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार करने का मजबूत आधार है। लेकिन, ये उपलब्धियां अभी तक हाई-लेवल इकोनॉमिक और राजनीतिक प्रभाव में नहीं बदल पाई हैं। राजनीतिक सशक्तिकरण (Political Empowerment) के मामले में भारत अभी भी केवल 24.5% के स्तर पर अटका हुआ है, जो हमारी कुल रैंकिंग को पीछे खींच रहा है।\n\n### निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?\n\nइन्वेस्टमेंट कम्युनिटी के नजरिए से, यह डेटा 'ह्यूमन कैपिटल' के इस्तेमाल का एक मैक्रो-इंडिकेटर है। जब बड़ी आबादी का एक हिस्सा बड़े फैसले लेने वाली भूमिकाओं या फॉर्मल लेबर मार्केट से बाहर रहता है, तो पूरी इकॉनमी की प्रोडक्टिविटी सीमित हो जाती है। कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं की भागीदारी न केवल डायवर्सिटी के लिए, बल्कि ऑर्गेनाइजेशनल एफिशिएंसी और बेहतर फैसले लेने की क्षमता के लिए भी जरूरी मानी जाती है।\n\nआने वाले समय में, निवेशकों को उन स्ट्रक्चरल सुधारों पर नजर रखनी चाहिए जो वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ा सकते हैं। भारत की अगली बड़ी विकास गाथा इस बात पर निर्भर करेगी कि देश अपने इस टैलेंट पूल का कितना प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर पाता है।
