सरकार ने अनिवार्य प्रोविडेंट फंड (PF) की सैलरी सीमा को बढ़ाकर **₹25,000** कर दिया है। इस बदलाव से अब पेंशन फंड में ज्यादा योगदान जाएगा, जिससे **58** साल की उम्र के बाद लगभग **₹9,600** की मंथली पेंशन मिलेगी। हालांकि, इसका सीधा असर रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त रकम (Lump-sum) पर पड़ेगा, जो **25** साल के करियर में करीब **₹20 लाख** तक कम हो सकती है।
सरकार के इस नए नियम के तहत अब अनिवार्य PF कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। यह बदलाव सीधे तौर पर बताता है कि अब वेतनभोगी कर्मचारियों की सैलरी का एक बड़ा हिस्सा एम्प्लॉई पेंशन स्कीम (EPS) में जाएगा।
पेंशन बनाम लंप-सम (Pension vs Lump-sum)
इस नई पॉलिसी के चलते एम्प्लॉयर का बड़ा हिस्सा पेंशन फंड की ओर डायवर्ट हो गया है। अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹25,000 है, तो हर महीने ₹2,083 सीधे पेंशन अकाउंट में जाएंगे। इसका फायदा यह है कि रिटायरमेंट के बाद आपको ₹9,643 की गारंटीड मंथली पेंशन मिलेगी। वहीं, नुकसान यह है कि रिटायरमेंट के समय मिलने वाला एकमुश्त फंड करीब ₹20.63 लाख तक कम हो जाएगा।
महंगाई और लिक्विडिटी का रिस्क
पेंशन की राशि फिक्स्ड होने के कारण महंगाई के दौर में इसकी परचेजिंग पावर कम हो सकती है। साथ ही, PF बैलेंस कम होने से उन युवाओं को मुश्किल हो सकती है जो शिक्षा या घर खरीदने के लिए PF के पैसे का इस्तेमाल करते थे।
सावधान रहें!
EPFO सिस्टम में अब डेटा की सटीकता बहुत जरूरी हो गई है। फॉर्म 11 जैसे दस्तावेजों में कोई भी गलती होने पर विड्रॉल या ट्रांसफर में महीनों की देरी हो सकती है। भविष्य में अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी बनाए रखने के लिए अब केवल सरकारी योजनाओं पर निर्भर रहने के बजाय खुद की सेविंग्स प्लानिंग को री-एवैल्युएट करना बेहद जरूरी है।
