भारत की इकॉनमी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही में **7.35%** की ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा RBI के **7.2%** के अनुमान से बेहतर है, हालांकि बढ़ती महंगाई और सरकारी खजाने पर दबाव निवेशकों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है।
भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में मजबूती दिखाई है। फाइनेंस मिनिस्ट्री के आंकड़ों के अनुसार, विकास दर 7.35% रही है। इस ग्रोथ को मुख्य रूप से घरेलू खपत, GST कलेक्शन, एनर्जी कंजम्पशन और इंडस्ट्रियल आउटपुट से सहारा मिला है।
महंगाई का बढ़ता खतरा
विकास दर के अच्छे आंकड़ों के बीच महंगाई का दबाव साफ दिख रहा है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) बास्केट में 22.35% ऐसी वस्तुएं हैं जिनकी कीमतें 6% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं, जो साल की शुरुआत के मुकाबले दोगुनी हैं। सप्लाई-चेन में बाधा और बढ़ती इनपुट कॉस्ट अब व्यापक स्तर पर असर डाल रही है।
फिस्कल डेफिसिट और सरकारी खजाना
वित्तीय मोर्चे पर चुनौतियां गंभीर हैं। अप्रैल-अगस्त के दौरान सरकारी फिस्कल डेफिसिट 18.7% बढ़ा है, जबकि प्राइमरी डेफिसिट में 181% का भारी उछाल आया है। टैक्स रेवेन्यू में केवल 6.5% की ग्रोथ हुई है, जो नॉमिनल GDP की रफ्तार से काफी कम है। साथ ही, कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल तक छूने के कारण सरकारी खजाने पर सब्सिडी का बोझ बढ़ रहा है।
विदेशी मुद्रा और बाहरी जोखिम
पिछले एक साल में भारतीय रुपया 7.5% तक कमजोर हुआ है। लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए सरकार FCNR(B) जैसे डेट-बेस्ड इनफ्लो पर निर्भर है, जो विदेशी फंडिंग पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। साल की दूसरी छमाही में वार्षिक लक्ष्य 7-7.1% को हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था को 6.4% से 6.6% की ग्रोथ बनाए रखनी होगी, जिसके लिए निवेश की रफ्तार और बाहरी परिस्थितियों (खासकर वेस्ट एशिया की स्थिति) पर नजर रखना जरूरी है।
