चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ **7.8%** रही है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के **7%** के अनुमान से कहीं बेहतर है। मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था में यह तेजी देखने को मिली है।
आंकड़ों में दिखी भारत की ताकत
फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8% की शानदार ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा न केवल उम्मीदों से बेहतर है, बल्कि ग्लोबल चुनौतियों के बीच भारतीय बाजार के मजबूत फंडामेंटल्स की गवाही देता है। 31 अगस्त को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स और सही पॉलिसी लागू करने का फायदा साफ दिख रहा है।
कौन से फैक्टर रहे ग्रोथ के पीछे?
चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर वी. अनंत नागेश्वरन ने इसे अर्थव्यवस्था के लचीलेपन का प्रमाण बताया है। ग्रोथ को आगे बढ़ाने में मुख्य रूप से तीन चीजों ने भूमिका निभाई:
- मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: उत्पादन में जबरदस्त तेजी।
- सर्विस सेक्टर: बेहतर प्रदर्शन जारी।
- घरेलू खपत: प्राइवेट कंजम्पशन बढ़ने और बैंक क्रेडिट में उछाल आने से निवेश और खर्च करने का भरोसा बढ़ा है।
महंगाई और सरकारी खजाना
जुलाई 2026 में रिटेल इन्फ्लेशन 4.45% दर्ज की गई, जो RBI की कंफर्ट रेंज के भीतर है। इसके साथ ही, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) के जरिए लगातार बढ़ रहा टैक्स कलेक्शन सरकारी खजाने को मजबूती दे रहा है, जिससे बजट घाटे का डर कम हुआ है।
आगे की चुनौतियां
सब कुछ अच्छा दिखने के बावजूद, कुछ रिस्क अभी भी बने हुए हैं। वेस्ट एशिया में चल रहे जियोपॉलिटिकल तनाव का असर एनर्जी सप्लाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। इसके अलावा, खाने-पीने की चीजों के दाम में उतार-चढ़ाव और मानसून की अनिश्चितता आने वाले महीनों में महंगाई और ग्रामीण मांग के लिए चुनौती पैदा कर सकती है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर आगे अपनी लय कैसे बनाए रखते हैं और मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर सेंट्रल बैंक का अगला कदम क्या होगा।
