भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में **7.8%** की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जो बाजार के अनुमानों से काफी बेहतर है। साथ ही, IMF ने भारत के नए सांख्यिकीय ढांचे को मंजूरी दे दी है, जिससे डेटा पर भरोसा और मजबूत हुआ है।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और बाजार के तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। इस ग्रोथ को सर्विस सेक्टर में 10%, मैन्युफैक्चरिंग में 9.2% और एक्सपोर्ट में 12% की जोरदार बढ़त से बल मिला है।
IMF का भरोसा
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने भारत की ओर से मैक्रोइकॉनॉमिक डेटा को आधुनिक बनाने के प्रयासों की सराहना की है। IMF की कम्युनिकेशंस डायरेक्टर जूली कोजैक ने साफ किया कि नए इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) को शामिल करना एक सकारात्मक कदम है। इससे विदेशी निवेशकों के बीच डेटा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी।
एनर्जी प्राइसेस का रिस्क
ग्रोथ के आंकड़ों के बावजूद, मैक्रोइकॉनॉमिक मोर्चे पर चुनौतियां बरकरार हैं। भारत कच्चे तेल का एक बड़ा आयातक है, इसलिए ग्लोबल एनर्जी प्राइसेस में उतार-चढ़ाव सीधा असर डाल सकते हैं। बढ़ते एनर्जी खर्च से न केवल आयात बिल बढ़ सकता है, बल्कि भारतीय रुपये पर भी दबाव आ सकता है।
अब बाजार की निगाहें अक्टूबर में आने वाली IMF की अपडेटेड इकोनॉमिक फोरकास्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होगा कि ग्लोबल जियोपॉलिटिकल तनाव और कच्चे तेल की अस्थिरता का असर साल के बाकी महीनों में कैसा रह सकता है।
