BRICS Summit: ट्रेड डेफिसिट कम करने की तैयारी में भारत, एक्सपोर्ट बढ़ाकर संतुलन बनाने पर जोर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
BRICS Summit: ट्रेड डेफिसिट कम करने की तैयारी में भारत, एक्सपोर्ट बढ़ाकर संतुलन बनाने पर जोर

नई दिल्ली में आयोजित हो रहे 18वें BRICS समिट में भारत ने ब्लॉक के साथ बढ़ते ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को कम करने के लिए कमर कस ली है। फाइनेंशियल ईयर **2025-26** में यह घाटा लगभग **$226.1 बिलियन** तक पहुंच गया है, जिसे कम करने के लिए सरकार अब फार्मा, इंजीनियरिंग और डिजिटल सर्विसेज के एक्सपोर्ट को बढ़ावा दे रही है।

नई दिल्ली में चल रहे 18वें BRICS समिट के दौरान भारत का ट्रेड असंतुलन मुख्य चर्चा का विषय बना हुआ है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में यह घाटा बढ़कर $226.1 बिलियन हो गया है, जो FY2021 में $74.5 बिलियन था। इस तेजी से बढ़ते अंतर को देखते हुए सरकार अब अपनी ट्रेड रणनीति को बदलने की दिशा में काम कर रही है ताकि केवल एनर्जी इम्पोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय एक संतुलित आर्थिक साझेदारी तैयार की जा सके।

आयात पर निर्भरता की चुनौती

मौजूदा ट्रेड स्ट्रक्चर में एनर्जी, क्रूड ऑयल और कच्चे माल का दबदबा है। भारत के कुल मर्चेंडाइज इम्पोर्ट में BRICS देशों की हिस्सेदारी 40% से ज्यादा है। चीन और रूस जैसे देशों से महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स और एनर्जी उत्पादों का भारी आयात होता है, जो घरेलू प्रोडक्शन के लिए तो जरूरी हैं, लेकिन भारत की तरफ से एक्सपोर्ट न बढ़ पाने के कारण यह डेफिसिट लगातार बढ़ रहा है।

एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन का नया प्लान

वाणिज्य मंत्रालय अब भारतीय उत्पादों के लिए ब्लॉक में बेहतर एक्सेस की मांग कर रहा है। सरकार ने फार्मा, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग और डिजिटल सर्विसेज जैसे सेक्टरों की पहचान की है। भारत 'BRICS ट्रेड बैरियर्स रेजोल्यूशन मैकेनिज्म' के जरिए उन बाधाओं को खत्म करने पर जोर दे रहा है जो भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए रुकावट बनी हुई हैं। साथ ही, लोकल करेंसी में ट्रेड सेटलमेंट की कोशिशें भी तेज कर दी गई हैं, जिससे ट्रांजैक्शन आसान होंगे और डॉलर पर निर्भरता घटेगी।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

यह रणनीति फार्मा, इंजीनियरिंग और टेक कंपनियों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। अगर भारत ट्रेड बैरियर्स कम करने में सफल रहता है, तो इन सेक्टर्स के मार्जिन और एक्सपोर्ट वॉल्यूम में अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। हालांकि, निवेशकों को सचेत रहना होगा क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव और एनर्जी प्राइसेस में उतार-चढ़ाव सप्लाई चेन के लिए बड़ा जोखिम बने हुए हैं। आने वाले समय में सरकारी फैसलों और ट्रेड एग्रीमेंट्स पर नजर रखना मुनाफे के लिए जरूरी होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.