अमेरिका में लागू हुए 'Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act' के बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। भारत अपनी **50%** से ज्यादा तेल जरूरतें रूस से पूरी करता है, ऐसे में अमेरिकी टैरिफ का डर निवेशकों के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है।
अमेरिका में 18 सितंबर, 2026 को नए कानून के लागू होने के बाद से भारत की ऊर्जा कूटनीति सक्रिय हो गई है। इस नए कानून के तहत अमेरिकी सरकार उन देशों पर 100% तक टैरिफ लगा सकती है जो रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस का आयात जारी रखते हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने अमेरिकी सीनेटर एंजेला अल्सोब्रूक्स के साथ बैठक की है, ताकि भारत की 1.4 अरब की आबादी के लिए स्थिर ऊर्जा सप्लाई बनी रहे।
बाजार पर असर और बिजनेस रिस्क
अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपने कुल क्रूड ऑयल का आधे से ज्यादा हिस्सा रूस से मंगाता है। अगर अमेरिका इन टैरिफ अधिकारों का इस्तेमाल करता है, तो भारत को महंगे विकल्पों की ओर शिफ्ट होना पड़ सकता है। इसका सीधा असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के प्रॉफिट मार्जिन पर पड़ेगा और घरेलू ईंधन की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है।
आगे की राह
फिलहाल, सरकार का जोर अमेरिकी प्रशासन से छूट (Exemptions) पाने और स्पष्टता हासिल करने पर है। निवेशक इस मामले में विदेश मंत्रालय के आधिकारिक बयानों और अमेरिकी रेगुलेटर्स की गाइडलाइंस पर कड़ी नजर रखें, क्योंकि यही तय करेगा कि यह ट्रेड रिस्क भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए कितना बड़ा वित्तीय झटका बन सकता है।
