सरकार अब देश में ही हाई-टेक सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) मॉड्यूल के निर्माण के लिए इंडस्ट्री के साथ चर्चा कर रही है। इस कदम का मकसद पावर ग्रिड को सुरक्षित बनाना और इंपोर्टेड इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट पर निर्भरता कम करना है।
भारत की नई रणनीति
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय और बिजली मंत्रालय ने मिलकर सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) पावर मॉड्यूल के डिजाइन और उत्पादन को भारत लाने की पहल शुरू की है। ये चिप्स आधुनिक बिजली नेटवर्क का 'दिमाग' माने जाते हैं, जो विशेष रूप से हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) ट्रांसमिशन लाइनों के लिए बेहद जरूरी हैं।
बढ़ते इंपोर्ट का संकट
फिलहाल भारत इन एडवांस कंपोनेंट्स के लिए पूरी तरह इंपोर्ट पर निर्भर है। साल 2025 तक देश में सोफिस्टिकेटेड इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट की मांग $59 बिलियन तक पहुंच गई है। चिंता की बात यह है कि पिछले 5 वर्षों में इंपोर्टेड कंपोनेंट्स पर निर्भरता 22% से बढ़कर 33% हो गई है। सरकार का मानना है कि लोकल प्रोडक्शन के बिना पावर सेक्टर सप्लाई चेन के जोखिमों से घिर सकता है।
इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए क्यों है जरूरी?
Power Grid Corporation of India इस प्रोजेक्ट में सहयोग कर रहा है। अगर यह मिशन सफल होता है, तो लंबे समय में पावर ग्रिड के मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन की लागत कम हो जाएगी। हालांकि, SiC टेक्नोलॉजी काफी जटिल है और इसे बनाना साधारण सिलिकॉन चिप्स की तुलना में कठिन है। इसमें भारी निवेश और रिसर्च की जरूरत होगी।
आगे क्या होगा?
सरकार ने इंडस्ट्री से इनपुट लेने के लिए 8 अक्टूबर तक का समय दिया है, जबकि रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) पर औपचारिक बैठक 14 अक्टूबर को होनी है। इन ऑफर्स में मिलने वाले इंसेंटिव्स ही तय करेंगे कि कौन सी कंपनियां इस क्षेत्र में कदम रखने का रिस्क उठाएंगी।
