BRICS Tax Rules: टैक्स विवादों को सुलझाने के लिए भारत का बड़ा कदम, दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव

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AuthorAditya Rao|Published at:
BRICS Tax Rules: टैक्स विवादों को सुलझाने के लिए भारत का बड़ा कदम, दो नए वर्किंग ग्रुप का प्रस्ताव

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने BRICS देशों के बीच टैक्स नियमों और ट्रांसफर प्राइसिंग को व्यवस्थित करने के लिए दो नए वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का मकसद उभरती अर्थव्यवस्थाओं की वैश्विक टैक्स नीतियों में आवाज मजबूत करना है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों को लेकर BRICS देशों के नजरिए को एक करने की बड़ी पहल की है। भारत की अध्यक्षता के दौरान, दो स्थायी वर्किंग ग्रुप बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। पहला ग्रुप इंटरनेशनल टैक्सेशन और ट्रांसफर प्राइसिंग पर काम करेगा, जबकि दूसरा सदस्य देशों के बीच राजस्व आंकड़ों (Revenue Statistics) को मानक रूप देगा। रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव के अनुसार, इसका उद्देश्य एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार करना है जो 2026 के बाद भी सक्रिय रहे।

निवेशकों और कंपनियों के लिए क्या हैं मायने?

वर्तमान में, कई क्रॉस-बॉर्डर टैक्स विवाद ट्रांसफर प्राइसिंग के कारण होते हैं। इन विवादों को सुलझाने और रेवेन्यू मापने के तरीके को एक समान करके, भारत BRICS ब्लॉक में काम करने वाली कंपनियों के लिए एक स्थिर माहौल बनाना चाहता है। यह कदम OECD जैसे वैश्विक ढांचे का एक विकल्प माना जा रहा है, जिन्हें अक्सर विकसित देशों के पक्ष में देखा जाता है।

नई चुनौती और अवसर

यदि ये वर्किंग ग्रुप सफल होते हैं, तो टैक्स ऑडिट और संधियों की व्याख्या में एकरूपता आएगी, जिससे कंपनियों का समय और पैसा बचेगा। हालांकि, इसके साथ कुछ जटिलताएं भी जुड़ी हैं। यदि BRICS के नियम OECD के मानकों से अलग होते हैं, तो ग्लोबल कंपनियों को 2 अलग-अलग सेट के टैक्स प्रोटोकॉल मैनेज करने पड़ सकते हैं। फिलहाल, निवेशकों को यह देखना होगा कि ये ग्रुप केवल सलाहकारी (Advisory) बने रहते हैं या बाध्यकारी नियम (Binding Framework) लागू कर पाते हैं, क्योंकि टैक्स ऑडिट और एडवांस प्राइसिंग एग्रीमेंट सीधे कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को प्रभावित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.