Q1 FY27 में भारत के प्राइवेट सेक्टर ने **₹15.4 लाख करोड़** के नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है, जो पिछले साल के मुकाबले **97%** ज्यादा है। वहीं, सरकारी खर्च में **36%** की कमी देखी गई है, जो अब निवेश के नए ट्रेंड्स की ओर इशारा करती है।
भारत के इन्वेस्टमेंट पैटर्न में पहली तिमाही (Q1 FY27) में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जहां प्राइवेट सेक्टर ने ₹15.4 लाख करोड़ का भारी-भरकम निवेश प्लान किया है, वहीं सरकारी केपेक्स घटकर ₹2.4 लाख करोड़ रह गया है। यह साफ दिखाता है कि अब प्राइवेट प्लेयर्स अर्थव्यवस्था में नए निवेश के मुख्य ड्राइवर बन गए हैं।
टेक और एनर्जी का दबदबा
यह निवेश हर जगह नहीं, बल्कि चुनिंदा सेक्टर में केंद्रित है। पावर सेक्टर में निवेश दोगुना होकर ₹7.6 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जबकि IT सेक्टर में यह आंकड़ा लगभग 4 गुना उछलकर ₹6.5 लाख करोड़ रहा। इसमें डेटा सेंटर्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सबसे ज्यादा जोर है।
मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन में सुस्ती
उत्साह के बीच कुछ पारंपरिक सेक्टर अभी भी संघर्ष कर रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग में निवेश 40% घटकर ₹2.2 लाख करोड़ पर आ गया है, और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में यह आंकड़ा गिरकर सिर्फ ₹15,000 करोड़ रह गया है। इसके अलावा, करीब ₹1 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स को ठंडे बस्ते में डाला गया है, जो कंपनियों की चुनिंदा रणनीति को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए संकेत
इन सबके बावजूद भारत की GDP ग्रोथ 7.8% रही, जिसने बाजार के 7.3% - 7.5% के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है। अब निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या यह निवेश चक्र आगे चलकर मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन जैसे सेक्टरों तक फैलता है या नहीं।
