Private Investment: भारतीय कंपनियों का बड़ा दांव, रिकॉर्ड **₹5.6 लाख करोड़** के निवेश का ऐलान

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AuthorNeha Patil|Published at:
Private Investment: भारतीय कंपनियों का बड़ा दांव, रिकॉर्ड **₹5.6 लाख करोड़** के निवेश का ऐलान

FY26 में प्राइवेट सेक्टर ने निवेश के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और **₹5.6 लाख करोड़** के नए प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है। हालांकि, यह निवेश सिर्फ कुछ चुनिंदा बड़े इंफ्रा और पावर प्रोजेक्ट्स तक ही सीमित है, जबकि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अभी भी सुस्त बना हुआ है।

निवेश के आंकड़ों का असली सच

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, प्राइवेट सेक्टर ने चालू फाइनेंशियल ईयर में निवेश का एक नया कीर्तिमान बनाया है। लेकिन अगर आप इन आंकड़ों की गहराई में जाएंगे, तो पता चलेगा कि यह ग्रोथ हर सेक्टर में बराबर नहीं है। हकीकत यह है कि कुल निवेश का करीब 68% हिस्सा सिर्फ 112 बड़े प्रोजेक्ट्स के जरिए आ रहा है, जिसमें 12 मेगा-प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

पावर और इंफ्रा का बोलबाला

ज्यादातर कैपिटल स्पेंडिंग सरकारी नीतियों से प्रेरित पावर और रोड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में हो रही है। इसके उलट, ट्रेडिशनल मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर जैसे केमिकल्स, मेटल्स और टेक्सटाइल्स में निवेश की रफ्तार बहुत धीमी है। निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल घोषणाएं काफी नहीं होतीं। आंकड़ों के मुताबिक, घोषित किए गए निवेश का सिर्फ 33% (यानी एक तिहाई) हिस्सा ही वास्तव में जमीन पर उतर पाता है।

मैन्युफैक्चरिंग में क्यों है सुस्ती?

मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां अभी भी कंज्यूमर डिमांड के बढ़ने का इंतजार कर रही हैं। वे अपनी मौजूदा फैक्ट्रियों की क्षमता का पूरा इस्तेमाल करने के बाद ही नई कैपेसिटी पर पैसा खर्च करने का जोखिम लेना चाहती हैं। जब तक कंज्यूमर डिमांड में जोरदार उछाल नहीं आता, तब तक प्राइवेट निवेश का यह चक्र इसी तरह असंतुलित बना रहेगा, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां तो फायदे में रहेंगी, लेकिन बाकी इंडस्ट्रीज को अपनी चाल बदलने के लिए और इंतजार करना पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.