भारत पहली बार World Bank के नए 'Business Ready' (B-READY) फ्रेमवर्क के तहत अपने बिजनेस माहौल का आकलन करवा रहा है। नवंबर 2026 में आने वाली यह रिपोर्ट बताएगी कि जमीनी स्तर पर भारत में व्यापार करना कितना आसान या मुश्किल है।
भारत अब World Bank के पुराने 'Ease of Doing Business' इंडेक्स को पीछे छोड़कर नए 'Business Ready' (B-READY) फ्रेमवर्क में शामिल हो रहा है। यह आकलन सिर्फ कागजी कानूनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह 10 अलग-अलग क्षेत्रों जैसे बिजनेस एंट्री, लोकेशन, यूटिलिटी सर्विसेज, लेबर और विवाद समाधान में कामकाज की असलियत को मापेगा।\n\n### क्या है नया बदलाव?\nनया सिस्टम तीन मुख्य स्तंभों पर टिका है: रेगुलेटरी फ्रेमवर्क, पब्लिक सर्विस डिलीवरी और ऑपरेशनल एफिशिएंसी। इसका मतलब है कि अब सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि कानून क्या कहता है, बल्कि यह परखा जाएगा कि सरकारी सिस्टम वाकई बिजनेस को सपोर्ट कर रहे हैं या फिर रुकावटें पैदा कर रहे हैं।\n\n### DPIIT की बड़ी जिम्मेदारी\nइस पूरी प्रक्रिया की कमान Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) संभाल रही है। सरकार का मकसद कंप्लायंस के बोझ को कम करना और अप्रूवल प्रोसेस को पूरी तरह डिजिटाइज करना है ताकि ग्लोबल और घरेलू निवेशकों के लिए एक पारदर्शी माहौल तैयार हो सके।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है अहम?\nइन्वेस्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती केंद्र की नीतियों और राज्यों में उनके क्रियान्वयन के बीच का अंतर है। नवंबर 2026 में जब यह रिपोर्ट आएगी, तो यह साफ हो जाएगा कि भारत के किस राज्य में व्यापार करना कितना स्मूथ है। अगर यह असेसमेंट डेटा राज्यों के बीच वर्कफ्लो को बेहतर दिखाता है, तो यह लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट्स के लिए मार्केट का कॉन्फिडेंस काफी बढ़ा सकता है।
