भारत सरकार एलपीजी (LPG) और नेचुरल गैस (Natural Gas) के उपभोक्ताओं पर नया टैक्स लगाने पर विचार कर रही है। इसका मकसद **$42 अरब** का स्ट्रेटेजिक फ्यूल रिजर्व बनाना है। यह कदम मिडिल ईस्ट जैसे इलाकों में सप्लाई डिस्टर्बेंस से देश को बचाने के लिए उठाया जा रहा है। अगर यह प्लान मंजूर होता है, तो घरों में गैस के बिलों में करीब **2%** की बढ़ोतरी हो सकती है, और फर्टिलाइजर, पावर और स्टील जैसे उद्योगों के लिए भी लागत बढ़ सकती है।
क्या है सरकार की नई योजना?
भारतीय सरकार फिलहाल लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) और नेचुरल गैस (Natural Gas) के उपभोक्ताओं पर नए लेवी (Levy) लगाने की योजना का मूल्यांकन कर रही है। इस प्लान का मुख्य उद्देश्य $42 अरब का एक बड़ा स्ट्रेटेजिक फ्यूल रिजर्व (Strategic Fuel Reserve) तैयार करना है, जिसके लिए कैबिनेट की मंजूरी का इंतजार है। यह कदम भारत की एनर्जी सिक्योरिटी (Energy Security) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अब तक केवल क्रूड ऑयल (Crude Oil) का ही स्ट्रेटेजिक रिजर्व रखा जाता रहा है।
कितना बढ़ सकता है खर्च?
प्रपोजल के अनुसार, एलपीजी (LPG) पर प्रति किलोग्राम ₹1.29 का लेवी लगाया जा सकता है। इससे एक स्टैंडर्ड डोमेस्टिक कुकिंग गैस सिलेंडर की कीमत करीब ₹18 बढ़ जाएगी। वहीं, नेचुरल गैस (Natural Gas) के लिए प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर ₹1.43 चार्ज करने पर विचार किया जा रहा है। अनुमान है कि इन छोटी-छोटी बढ़ोतरी से सालाना करीब $1.5 अरब का फंड जुटाया जा सकेगा, जिसका इस्तेमाल स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर (Storage Infrastructure) बनाने में होगा।
एनर्जी सिक्योरिटी की जरूरत
दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इम्पोर्टर (Oil Importer) भारत, खासकर मिडिल ईस्ट में हालिया सप्लाई चेन की दिक्कतों के बाद से एनर्जी सिक्योरिटी को लेकर काफी गंभीर हो गया है। भारत के पास सरकार के स्वामित्व वाला क्रूड ऑयल रिजर्व तो है, लेकिन नेचुरल गैस (Natural Gas) और एलपीजी (LPG) के लिए समर्पित स्ट्रेटेजिक स्टोरेज की कमी है। इसकी तुलना में जापान और साउथ कोरिया जैसे देश अपनी जरूरत के 100 दिनों से ज्यादा के फ्यूल का रिजर्व रखते हैं, जबकि भारत का वर्तमान कैपेसिटी (Capacity) 10 दिनों से भी कम का है।
इकोनॉमी पर असर
इस योजना का एक मकसद घरेलू उपभोक्ताओं और उद्योगों को ग्लोबल प्राइस वोलेटिलिटी (Price Volatility) और सप्लाई कटऑफ (Supply Cutoff) से बचाना है। हालांकि, इसमें कुछ चुनौतियां भी हैं। गैस बिलों में 2% की बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है। साथ ही, पावर जेनरेशन (Power Generation), फर्टिलाइजर प्रोडक्शन (Fertilizer Production) और स्टील मैन्युफैक्चरिंग (Steel Manufacturing) जैसे नेचुरल गैस (Natural Gas) पर निर्भर उद्योगों के लिए ऑपरेशनल कॉस्ट (Operational Cost) बढ़ सकती है, अगर यह लेवी उन पर पास ऑन किया जाता है।
चूंकि यह प्लान अभी इंटर-मिनिस्ट्रियल डिस्कशन (Inter-ministerial Discussion) के दौर में है, इसलिए अंतिम निर्णय और फंड कलेक्शन का तरीका अभी तय नहीं है। सरकार एनर्जी सिक्योरिटी के फायदे और ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले तत्काल असर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है। निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों को आने वाली कैबिनेट मीटिंग्स पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि इस लेवी स्ट्रक्चर (Levy Structure) का अप्रूवल या संशोधन एनर्जी-इंटेंसिव मैन्युफैक्चरिंग (Energy-intensive manufacturing) और पावर सेक्टर की कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) पर सीधा असर डाल सकता है।
