India का बदलता वैश्विक कद: अब दुनिया तय करेगी इकोनॉमी का एजेंडा!

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
India का बदलता वैश्विक कद: अब दुनिया तय करेगी इकोनॉमी का एजेंडा!

13वें SBI बैंकिंग एंड इकोनॉमिक्स कॉन्क्लेव में डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स ने भारत की **$4.3 ट्रिलियन** की इकोनॉमी बनने की कहानी साझा की। अब भारत वैश्विक स्तर पर ट्रेड और फाइनेंशियल पॉलिसीज में अपनी धाक जमाने की तैयारी में है।

ग्लोबल लीडर बनने की तैयारी

डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (DEA) की सेक्रेटरी अनुराधा ठाकुर ने बताया कि भारत अब वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सिर्फ एक भागीदार नहीं, बल्कि एक 'एजेंडा-सेटर' के रूप में उभर रहा है। यह बदलाव डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और विकासशील वित्त में बड़े सुधारों के कारण संभव हुआ है।

इकोनॉमी की रफ्तार और ताकत

भारत ने अपनी विकास यात्रा में शानदार प्रदर्शन किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश की GDP $2.5 ट्रिलियन से बढ़कर $4.3 ट्रिलियन तक पहुंच गई है, जो करीब 77% की बड़ी बढ़त है। सरकार ने अपनी फिस्कल डिसिप्लिन (Fiscal Discipline) पर भी जोर दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर चल रहे सॉवरेन डेट (Sovereign Debt) के दबाव से भारत खुद को बचा पा रहा है।

बैंकिंग और ट्रेड का दम

देश का बैंकिंग सेक्टर वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। State Bank of India और HDFC Bank जैसी संस्थाएं ग्लोबल स्तर पर टॉप 100 बैंकों में शामिल हो चुकी हैं। वहीं, एग्रीकल्चर सेक्टर भी मजबूती से जुड़ा है, जहाँ 2024-25 में खाद्यान्न उत्पादन 357.73 मिलियन टन रहा और कृषि निर्यात $51 बिलियन तक पहुंच गया।

ट्रेड डील और भविष्य की राह

भारत ने पिछले 5 वर्षों में 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (FTA) किए हैं, जिनमें 38 देश शामिल हैं। अब सभी की नजरें European Union के साथ होने वाली ट्रेड डील पर हैं, जो टेक्सटाइल और लेदर जैसे उद्योगों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। सरकार का अगला बड़ा फोकस घरेलू बचत को औपचारिक बैंकिंग सिस्टम में लाकर उसे प्रोडक्टिव इन्वेस्टमेंट में बदलना है, ताकि लॉन्ग-टर्म स्टैबिलिटी बनी रहे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.