Trade Diplomacy: एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए सरकार की नई रणनीति, कंपनियों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Trade Diplomacy: एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए सरकार की नई रणनीति, कंपनियों के लिए खुलेंगे नए रास्ते

सरकार अब मंत्री-स्तरीय दौरों में कॉरपोरेट डेलिगेशन को शामिल कर रही है ताकि सीधे एक्सपोर्ट ऑर्डर और निवेश जुटाया जा सके। निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि क्या यह बिजनेस-लीड मॉडल कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ को रफ्तार दे पाएगा और ट्रेड डेफिसिट की चिंता को दूर करेगा।

भारतीय सरकार अब पारंपरिक सरकारी बातचीत से हटकर एक बिजनेस-सेंट्रिक मॉडल की ओर बढ़ रही है। अब आधिकारिक दौरों में बड़ी कंपनियों के डेलिगेशन को भी साथ ले जाया जा रहा है, ताकि कूटनीतिक संबंधों को सीधे आर्थिक फायदों में बदला जा सके। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं और सिंगापुर, जापान, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में इसके जरिए नए सौदे करने की कोशिशें की जा रही हैं।\n\nयह कदम $1 ट्रिलियन के एक्सपोर्ट लक्ष्य को पूरा करने के लिए उठाया गया है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में मर्चेंडाइज और सर्विस एक्सपोर्ट 11.37% की बढ़त के साथ लगभग $232.73 बिलियन रहा है। बढ़ते ट्रेड डेफिसिट को देखते हुए सरकार अब केवल समझौता ज्ञापनों (MoU) के बजाय पक्के परचेज ऑर्डर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर फोकस कर रही है।\n\nइस दिशा में सरकार ने Export Promotion Mission (EPM) लॉन्च किया है, जिसके लिए ₹25,000 करोड़ का फंड रखा गया है। साथ ही, रुपयों में पेमेंट की नई सुविधा से एक्सपोर्टर्स का काम और आसान होगा।\n\nहालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर भी नजर रखनी चाहिए। देश में लॉजिस्टिक्स लागत अब भी बहुत ज्यादा है, जो मुनाफे पर दबाव डालती है। इसके अलावा, अमेरिका में टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और ग्लोबल सप्लाई चेन की समस्याएं एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित कर सकती हैं। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना सबसे महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन दौरों का असर लिस्टेड कंपनियों की ऑर्डर बुक में साफ तौर पर दिखता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.