भारत सरकार अपनी प्रमुख फसल बीमा योजना, PMFBY को अब हाई-टेक बना रही है। ड्रोन, सैटेलाइट मैपिंग और AI का इस्तेमाल करके इंश्योरेंस क्लेम की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा, जिससे किसानों और इंश्योरेंस कंपनियों को लंबे समय से चली आ रही देरी की समस्या से राहत मिलेगी।
भारत सरकार अपनी फ्लैगशिप फसल बीमा योजना, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana (PMFBY) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब तक फसलों के नुकसान का आकलन करने के लिए पारंपरिक और मेहनत वाली पद्धतियों का इस्तेमाल होता था, लेकिन अब इनकी जगह सैटेलाइट इमेजिंग, ड्रोन इंस्पेक्शन और AI-आधारित यील्ड एस्टिमेशन टूल्स लेंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि क्लेम सेटलमेंट में महीनों की देरी को खत्म किया जा सके और पूरी प्रक्रिया को ऑटोमैटिक बनाया जा सके।
तकनीक से बढ़ेगी कार्यक्षमता
इस डिजिटल ओवरहॉल में 'YES-TECH' फ्रेमवर्क और 'WINDS' सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म्स का उपयोग किया जा रहा है। ये टूल्स सटीक मौसम डेटा और फसल की सेहत की रियल-टाइम जानकारी देंगे। इंश्योरेंस सेक्टर के लिए यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि इससे कंपनियों के ऑपरेशनल खर्चों में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। जब मैन्युअल फील्डवर्क घटेगा, तो इंश्योरेंस कंपनियां अपने प्रॉफिट मार्जिन को बेहतर कर पाएंगी और क्लेम वेरिफिकेशन की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।
चुनौतियां और निवेशकों के लिए रिस्क
तकनीक के आने के बावजूद, इस सेक्टर के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। राज्यों द्वारा प्रीमियम भुगतान में देरी होना एक बड़ी बाधा रही है, जिससे इंश्योरेंस कंपनियों के कैश फ्लो पर असर पड़ता है। इसके अलावा, अगर AI मॉडल किसी छोटे क्षेत्र में हुए नुकसान (जैसे कीटों का हमला) को पकड़ने में चूक करते हैं, तो किसानों और कंपनियों के बीच विवाद बढ़ सकते हैं, जो क्लेम सेटलमेंट रेश्यो को प्रभावित कर सकते हैं।
डिजिटल पहुंच का सवाल
ग्रामीण इलाकों में डिजिटल गैप एक बड़ी चुनौती है। सरकार भले ही मोबाइल-फर्स्ट इंटरफेस और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड्स के जरिए नामांकन को सरल बना रही है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसान इसे कितनी आसानी से अपनाते हैं। निवेशकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह देखना होगा कि आने वाले सीजन में इस नई डिजिटल प्रणाली से क्लेम सेटलमेंट की गति में कितनी तेजी आती है और यह कंपनियों के अंडरराइटिंग प्रॉफिट को कितना स्थिर बना पाती है।
