वेस्ट एशिया में सप्लाई चेन पर मंडराते खतरे के बीच भारत ने अपनी एनर्जी स्ट्रैटेजी को पूरी तरह बदल दिया है। रुपये की सुरक्षा और सरकारी तेल कंपनियों जैसे IOCL, BPCL और HPCL को राहत देने के लिए RBI ने एक खास डॉलर विंडो लॉन्च की है।
वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता ने भारत के पारंपरिक तेल आयात रास्तों के सामने चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। दुनिया के लिए तेल का मुख्य जरिया 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) लगातार दबाव में है, जिसे देखते हुए सरकार ने सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए कमर कस ली है।
OMCs के लिए RBI का बड़ा कदम
इस नई स्ट्रैटेजी का सबसे अहम हिस्सा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का दखल है। 12 अक्टूबर, 2026 से सेंट्रल बैंक ने सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) यानी Indian Oil Corporation (IOCL), Bharat Petroleum (BPCL) और Hindustan Petroleum (HPCL) के लिए एक डेडिकेटेड डॉलर सुविधा शुरू की है।
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे मार्केट में डॉलर की अचानक और भारी मांग के कारण होने वाली उथल-पुथल कम होगी। निवेशकों के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि रुपये की कमजोरी के चलते जब ये कंपनियां डॉलर खरीदती थीं, तो उन पर भारी बोझ पड़ता था और उनके मुनाफे पर असर पड़ता था।
स्ट्रैटेजिक रिजर्व का विस्तार
सिर्फ करेंसी ही नहीं, बल्कि सरकार फिजिकल बफर बनाने पर भी ध्यान दे रही है। भारत Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के साथ मिलकर अपनी क्रूड ऑयल स्टोरेज क्षमता को 5.8 मिलियन बैरल से बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल करने पर काम कर रहा है। इसका मकसद 'जस्ट-इन-टाइम' प्रोक्योरमेंट मॉडल को खत्म कर अचानक आने वाले सप्लाई शॉक से बचना है।
ग्रीन एनर्जी का लक्ष्य
हालांकि, भारत अभी भी क्रूड ऑयल के मामले में 89% आयात पर निर्भर है, लेकिन सरकार लॉन्ग-टर्म में ग्रीन एनर्जी पर शिफ्ट हो रही है। देश ने 2030 तक 500 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 300 GW का लक्ष्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। निवेशकों को सलाह है कि वे क्रूड ऑयल की कीमतों, RBI की डॉलर विंडो के असर और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स की गति पर पैनी नजर रखें।
