Ministry of Mines ने अंडमान सागर में दो ऑफशोर मिनरल ब्लॉक्स की नीलामी शुरू की है। इसमें कोबाल्ट, निकेल और कॉपर के बड़े भंडार होने की उम्मीद है, जो EV और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर के लिए बेहद अहम हैं।
नीलामी की प्रक्रिया और ब्लॉक्स की जानकारी
भारत सरकार ने अंडमान सागर में Sewell Rise-01 और West Sewell Ridge-01 नाम के दो ऑफशोर मिनरल ब्लॉक्स के लिए बोलियां आमंत्रित की हैं। ये ब्लॉक्स कुल 1,632 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैले हैं। इन क्षेत्रों में कोबाल्ट, निकेल, मैंगनीज और कॉपर जैसे कीमती खनिजों के भंडार होने की संभावना है। सफल बोलीदाता को 'कंपोजिट लाइसेंस' मिलेगा, जिससे उसे प्रॉस्पेक्टिंग और माइनिंग दोनों के अधिकार मिल जाएंगे।
क्यों है यह रणनीतिक कदम?
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और रिन्यूएबल एनर्जी स्टोरेज के लिए कोबाल्ट और निकेल जैसे खनिजों की भारी डिमांड है। इन संसाधनों के जरिए सरकार विदेशी निर्भरता कम कर घरेलू स्तर पर माइनिंग को बढ़ावा देना चाहती है।
क्या बदले हैं नियम?
पिछली नीलामी के विफल होने के बाद, मंत्रालय ने 24 सितंबर, 2026 को नियमों में बदलाव किए हैं। अब तकनीकी रूप से क्वालिफाइड बिडर्स की न्यूनतम संख्या 3 से घटाकर 2 कर दी गई है। 2024 में इसी तरह की एक नीलामी में अरब और अंडमान सागर के 13 ब्लॉक्स के लिए कोई खरीदार नहीं मिला था, जिसके बाद यह नया और फोकस्ड तरीका अपनाया गया है।
निवेशकों के लिए चुनौतियां
निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि डीप-सी माइनिंग बेहद चुनौतीपूर्ण और खर्चीली प्रक्रिया है। इसके लिए हाई-टेक मशीनों और कड़े पर्यावरण नियमों के पालन की जरूरत होती है। साथ ही, समुद्र की गहराइयों में खनिजों की वास्तविक मात्रा और गुणवत्ता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी रहती है। यह एक लॉन्ग-जेस्टेशन वाला बिजनेस है, जहां मुनाफा दिखने में लंबा समय लग सकता है।
