भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अगले महीने से लागू होने जा रहा है। इस डील के तहत भारतीय एक्सपोर्ट्स को **100%** ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा और अगले **15 साल** में **$20 अरब** का फॉरेन इन्वेस्टमेंट भारत आने की उम्मीद है।
व्यापार का नया द्वार
भारत और न्यूजीलैंड के बीच द्विपक्षीय फ्री ट्रेड एग्रीमेंट अगले महीने से अपना काम शुरू कर देगा, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। इस समझौते के बाद 8,200 से ज्यादा टैरिफ लाइन्स पर भारतीय एक्सपोर्ट्स को 100% ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिल जाएगा। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स और सिरेमिक्स जैसे सेक्टरों में भारतीय कंपनियों की कॉम्पिटिटिवनेस में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
सुरक्षा और संतुलन
सरकार ने इस डील में देश के 'सेंसिटिव' सेक्टरों का भी पूरा ध्यान रखा है। भारत ने न्यूजीलैंड से आने वाले 95% इम्पोर्ट्स पर टैरिफ तो कम किया है, लेकिन डेयरी और कुछ एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स को पूरी तरह सुरक्षित रखा है ताकि स्थानीय किसानों पर इसका कोई बुरा असर न पड़े।
$20 अरब का बड़ा इन्वेस्टमेंट
यह एग्रीमेंट सिर्फ सामानों की आवाजाही तक सीमित नहीं है। न्यूजीलैंड ने अगले 15 सालों में भारत में $20 अरब का फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) करने का वादा किया है। यह पैसा मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी पार्टनर्सशिप में लगाया जाएगा। इसके अलावा, स्किल्ड प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए नए वीजा पाथवे भी खोले गए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच टैलेंट और नॉलेज शेयरिंग बढ़ेगी।
सफलता के लिए चुनौतियां
वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल ट्रेड वॉल्यूम लगभग $2.5 अरब से $4 अरब के बीच है, जो कि बहुत ज्यादा नहीं है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस डील का असर तभी दिखेगा जब भारतीय एक्सपोर्टर्स अंतरराष्ट्रीय क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड्स पर खरे उतरेंगे। साथ ही, यह $20 अरब का इन्वेस्टमेंट एक लंबा सफर है, जिसे जमीन पर उतारने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जरूरत होगी। फिलहाल, बाजार की नजरें इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में होने वाले शुरुआती निवेश पर टिकी हैं।
