इकोनॉमिक अफेयर्स सेक्रेटरी अनुराधा ठाकुर ने साफ कर दिया है कि 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य को सिर्फ सरकारी खर्च से हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए अब प्राइवेट सेक्टर से बड़े निवेश जुटाने की तैयारी है, जिसे बेहतर सॉवरेन रेटिंग और टैक्स रिफॉर्म्स का सहारा मिलेगा।
सरकारी बजट की अपनी सीमाएं हैं और देश को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए भारी-भरकम पूंजी की जरूरत है। सरकार अब बुनियादी ढांचे और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के लिए पूरी तरह सरकारी पैसे पर निर्भर रहने के बजाय प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने पर फोकस कर रही है।
ग्लोबल रेटिंग्स का मिला भरोसा
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ग्लोबल रेटिंग एजेंसियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। हाल ही में जापान की एजेंसी JCR ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को बढ़ाकर 'A-' कर दिया है। इससे पहले S&P Global Ratings ने भी भारत के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया था। ये रेटिंग्स अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच देश की आर्थिक स्थिरता और फिस्कल डिसिप्लिन को लेकर भरोसा बढ़ाती हैं, जिससे ग्लोबल कैपिटल का भारत आना और आसान हो जाएगा।
NK सिंह का ग्रोथ रोडमैप
15वें वित्त आयोग के पूर्व चेयरमैन एन.के. सिंह ने लंबे समय के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक रोडमैप दिया है। उनके मुताबिक, भारत को अपनी डोमेस्टिक सेविंग रेट को मौजूदा 34% से बढ़ाकर 38% से 40% के बीच ले जाना होगा। साथ ही, निवेश का बेहतर इस्तेमाल करना भी प्राथमिकता है ताकि उसका सीधा असर आउटपुट में दिख सके।
GST और फिस्कल टारगेट पर नजर
सरकार टैक्स बेस बढ़ाने के लिए GST ढांचे में बड़े बदलावों पर विचार कर रही है। बिजली, एविएशन टर्बाइन फ्यूल और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को टैक्स दायरे में लाने से सरकारी खजाना भर सकता है। निवेशकों को इन बदलावों पर पैनी नजर रखनी चाहिए क्योंकि इनका सीधा असर इन सेक्टरों की कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा।
वहीं, सरकार ने 2030-31 तक अपने कर्ज और GDP के अनुपात को 73.1% तक लाने का लक्ष्य रखा है। राज्यों के कर्ज की स्थिरता की स्वतंत्र जांच पर भी चर्चा चल रही है। आने वाले समय में इन पॉलिसी रिफॉर्म्स का क्रियान्वयन बॉन्ड यील्ड और कॉर्पोरेट मार्जिन पर बड़ा असर डाल सकता है।
