भारत सरकार विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के नियमों को आसान बनाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट से मंज़ूरी के लिए ₹5,000 करोड़ की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर ₹15,000 करोड़ करने पर विचार किया जा रहा है। इस कदम से बड़े विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और कंपनियों के लिए नियम सरल होंगे।
विदेशी निवेश को मिलेगी रफ़्तार
भारतीय अर्थव्यवस्था में विदेशी निवेश को और तेज़ करने के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। अभी ₹5,000 करोड़ से ज़्यादा के एफडीआई (FDI) प्रस्तावों को कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) से मंज़ूरी लेनी पड़ती है। अब सरकार इस सीमा को बढ़ाकर ₹15,000 करोड़ करने पर विचार कर रही है। इससे बड़े निवेश वाले प्रस्तावों को मंज़ूरी मिलने की प्रक्रिया तेज़ हो जाएगी।
सहायक कंपनियों (Subsidiaries) के लिए भी नियम आसान
सरकार सिर्फ मंज़ूरी की सीमा ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि विदेशी कंपनियों की सहायक कंपनियों के ज़रिए होने वाले निवेश के नियमों को भी सरल बनाने पर काम कर रही है। अभी इन सहायक कंपनियों को, भले ही उनकी पैरेंट कंपनी को पहले ही मंज़ूरी मिल चुकी हो, कई बार सरकारीThe bureaucratic hurdles का सामना करना पड़ता है। प्रस्तावित बदलावों के तहत, अगर मुख्य निवेश ढांचा पहले से ही नियमों के मुताबिक है, तो ऐसी सहायक कंपनियों को अलग से सरकारी मंज़ूरी की ज़रूरत नहीं होगी। इससे कंपनियां भारत में नए प्रोजेक्ट शुरू करने या विस्तार करने में कम प्रशासनिक देरी का अनुभव करेंगी।
हालिया नीतिगत सफलता से मिला हौसला
यह चर्चा ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में सरकार ने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए कई नीतियां लागू की हैं। मई 2026 में, सरकार ने प्रेस नोट 2 के तहत नए नियम लाए थे, जिन्होंने उन कंपनियों के लिए निवेश के नियमों को आसान बनाया था, जिनकी भूमि-सीमा वाले देशों से 10% तक गैर-नियंत्रक हिस्सेदारी (non-controlling ownership) थी। 20 अगस्त 2026 तक, इस बदलाव ने खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईटी और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में ₹4,896 करोड़ के 29 निवेश प्रस्तावों को मंज़ूरी दिलाने में मदद की है। अब सरकार बड़े सौदों के लिए प्रक्रियाओं को और सुव्यवस्थित करके इस गति को बनाए रखना चाहती है।
निवेशकों के लिए ज़रूरी बातें
हालांकि ये संभावित बदलाव कारोबार के लिए ज़्यादा अनुकूल माहौल का संकेत देते हैं, लेकिन बाज़ार के प्रतिभागियों को कुछ ज़रूरी बातों पर नज़र रखनी होगी। सबसे पहले, यह प्रस्ताव अभी भी विभिन्न मंत्रालयों के बीच चर्चा के दौर में है। इसके लागू होने का दारोमदार विभिन्न सरकारी विभागों के बीच सहमति बनने पर निर्भर करेगा।
दूसरे, राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, सरकार ज़मीनी सीमा वाले देशों से होने वाले निवेश पर कड़ी निगरानी बनाए रखेगी। मंज़ूरी की सीमा में किसी भी तरह की ढील के साथ विदेशी पूंजी के स्रोतों की जांच जारी रहने की संभावना है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि एफडीआई (FDI) लंबी अवधि की पूंजी निर्माण में मदद करता है, वहीं पिछले एक साल में भारतीय बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के प्रवाह में उतार-चढ़ाव देखा गया है। इन बदलावों की आधिकारिक सूचनाओं और समय-सीमा पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि ये पूंजी-गहन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट निष्पादन की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
