केंद्र सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों (MSME) को पब्लिक कॉन्ट्रैक्ट्स में बड़ी राहत देने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार MSMEs के लिए परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) की अनिवार्यता को खत्म कर सकती है। इस कदम से छोटे व्यवसायों को अपना वर्किंग कैपिटल बढ़ाने में मदद मिलेगी। FY26 में सेंट्रल गवर्नमेंट की प्रोक्योरमेंट का **50%** हिस्सा MSMEs ने हासिल किया था।
MSME के लिए बड़ी राहत की तैयारी!
मोदी सरकार छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs) को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। पब्लिक कॉन्ट्रैक्ट्स में बोली लगाने वाले MSMEs के लिए परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) की अनिवार्यता को खत्म किया जा सकता है। यह प्रस्ताव MSME मंत्रालय और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के बीच चर्चा का विषय है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे व्यवसायों पर वित्तीय बोझ कम करना और उनके वर्किंग कैपिटल को मुक्त करना है।
परफॉर्मेंस बैंक गारंटी का झंझट खत्म?
फिलहाल, सरकार से ₹1,00,000 से ऊपर के कॉन्ट्रैक्ट जीतने वाले MSMEs को प्रोजेक्ट वैल्यू का 3-10% तक PBG देना पड़ता है। यह राशि छोटी कंपनियों के लिए एक बड़ी रुकावट बनती है, क्योंकि यह उनके पैसे को लॉक कर देती है और उन्हें अन्य कामों या दैनिक खर्चों के लिए पूंजी की कमी हो जाती है। सरकार की योजना इस पारंपरिक बैंक गारंटी को मौजूदा क्रेडिट गारंटी स्कीम से बदलने की है, जिसमें सरकार लेंडर्स को बैकअप देती है। इससे जोखिम प्रबंधन का ढांचा बदल जाएगा।
सरकारी खरीद में MSME की बड़ी भूमिका
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकारी खरीद में MSMEs की भागीदारी बहुत बड़ी है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, सेंट्रल गवर्नमेंट की ₹2.30 लाख करोड़ की कुल खरीद का 50% हिस्सा MSMEs ने हासिल किया था। यह दिखाता है कि ये छोटे उद्योग इंफ्रास्ट्रक्चर और सेवा वितरण में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस बाधा को दूर करने से छोटे सप्लायर्स के लिए एंट्री बैरियर कम होगा, जिन्हें अक्सर बैंक गारंटी की लागत और संबंधित फीस का प्रबंधन करना मुश्किल लगता है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
जहां एक ओर इस पहल से MSME सेक्टर की लिक्विडिटी को बढ़ावा मिलेगा, वहीं निवेशकों को कुछ बातों पर गौर करना होगा। सबसे बड़ी चिंता यह है कि सरकारी प्रोजेक्ट्स के फेल होने या देरी होने पर सरकार का जोखिम बढ़ सकता है। परफॉर्मेंस बैंक गारंटी पारंपरिक रूप से इन जोखिमों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करती रही है। अगर यह सुरक्षा हटाई जाती है, तो सरकार को कॉन्ट्रैक्ट पूरा न होने के जोखिमों को प्रबंधित करने के लिए क्रेडिट गारंटी स्कीम पर अधिक निर्भर रहना होगा।
यह कदम हाल ही में पास हुए MSME डेवलपमेंट (अमेंडमेंट) बिल, 2026 के बाद आया है, जिसका उद्देश्य इस सेक्टर के कानूनी ढांचे को आधुनिक बनाना था। निवेशकों और बाजार पर्यवेक्षकों को नई गाइडलाइंस की बारीकियों पर नजर रखनी चाहिए, खासकर यह देखना होगा कि सरकार नई गारंटी व्यवस्था के तहत MSMEs का मूल्यांकन कैसे करेगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी प्रोजेक्ट्स समय पर और बजट के भीतर पूरे हों।
