India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, मॉनसून की वापसी में देरी हो रही है। सेंट्रल और नॉर्थ इंडिया में भारी बारिश के कारण खरीफ फसलों की कटाई और सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है, जिससे फूड इन्फ्लेशन का खतरा बढ़ गया है।
मॉनसून की चाल और बाजार पर असर
India Meteorological Department (IMD) ने संकेत दिए हैं कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपनी सामान्य समय-सीमा यानी मिड-सितंबर से पीछे चल रहा है। इस समय गंगा के तटीय इलाकों, झारखंड और ओडिशा के ऊपर लो-प्रेशर सिस्टम सक्रिय हैं, जिसकी वजह से सेंट्रल और नॉर्थ इंडिया में मूसलाधार बारिश जारी है। नमी और अस्थिर मौसम के कारण अभी भी सूखी हवाओं का दौर शुरू नहीं हो सका है, जो मॉनसून की विदाई के लिए जरूरी है।
एग्रीकल्चर सेक्टर के लिए रिस्क
निवेशकों को ध्यान देना होगा कि सितंबर की शुरुआत में हो रही यह बारिश दोधारी तलवार है। हालांकि कुछ फसलों के लिए यह नमी फायदेमंद हो सकती है, लेकिन कटाई के मुहाने पर खड़ी खरीफ फसलों के लिए यह आफत बन सकती है। भारी बारिश से फसल की क्वालिटी गिर सकती है और पैदावार (Yield) पर असर पड़ सकता है, जो आगे चलकर फूड इन्फ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ा सकता है।
इंफ्रा और लॉजिस्टिक्स पर चोट
केवल खेती ही नहीं, बल्कि इंफ्रा और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के लिए भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड जैसे राज्यों में भारी बारिश से जलभराव और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर काम रुकने की खबरें आम हैं। ऐसी स्थितियां सप्लाई चेन को बाधित करती हैं और प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन को पीछे धकेल सकती हैं, जिसका असर इन सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर दिख सकता है।
IMD के अनुसार, जब तक बारिश का दौर 5 दिनों तक पूरी तरह नहीं थमता और वायुमंडल में नमी कम नहीं होती, तब तक वापसी की प्रक्रिया शुरू नहीं मानी जाएगी। बाजार की नजर अब आने वाले वेदर अपडेट्स पर है, क्योंकि मॉनसून की देरी सीधे तौर पर रूरल डिमांड और महंगाई को प्रभावित करने वाली है।
