India Meteorological Department (IMD) के अनुसार, मानसून की वापसी **19 सितंबर, 2026** के आसपास पश्चिमी राजस्थान से शुरू हो सकती है। हालांकि, बंगाल की खाड़ी में बन रहे वेदर पैटर्न के कारण इसमें देरी की आशंका है, जो इस सीजन के **15%** बारिश के घाटे को लेकर चिंता बढ़ा रहा है।
मॉनसून की चाल और मौसम का मिजाज
IMD के अनुमानों के मुताबिक, मानसून का लौटना एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में बना गर्म माहौल नमी को सक्रिय रख सकता है, जिससे मानसून की पूर्ण वापसी में देरी हो सकती है।
2026 में बारिश की स्थिति और असर
इस साल मानसून सीजन काफी चुनौतीपूर्ण रहा है और मिड-सितंबर तक देश में बारिश का घाटा लगभग 15% दर्ज किया गया है। इसका सीधा असर कृषि क्षेत्र पर पड़ता है, क्योंकि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और कर्नाटक जैसे राज्यों में बारिश का वितरण असमान रहा है।
निवेशकों के लिए मानसून का सीधा संबंध रूरल इकोनॉमी (Rural Economy) से है। अच्छी बारिश से फसलें बेहतर होती हैं, जिससे किसानों की कमाई बढ़ती है और ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर गुड्स और फर्टिलाइजर्स की डिमांड में उछाल आता है। इसके उलट, कम बारिश से रूरल स्पेंडिंग पर असर पड़ सकता है और फूड इन्फ्लेशन (Food Inflation) बढ़ने का रिस्क भी बना रहता है।
रिस्क और आगे का आउटलुक
मौसम विभाग के अनुसार, 24 से 28 सितंबर के बीच बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर सिस्टम बन सकता है, जो पूर्वी और मध्य भारत में बारिश का आखिरी दौर ला सकता है। वहीं, 25 सितंबर के बाद उत्तर-पश्चिम भारत में एंटी-साइक्लोन बनने की उम्मीद है, जो मानसून की वापसी में मदद करेगा। मार्केट पार्टिसिपेंट्स इस पर नजर बनाए हुए हैं कि कृषि आउटपुट और रूरल कंजम्पशन पर इसका क्या असर पड़ेगा।
