सितंबर में हुई जोरदार बारिश के बाद भारत का मौसमी मानसून घाटा घटकर **12%** रह गया है। हालांकि पानी का स्तर सुधरा है, लेकिन उत्तर प्रदेश में बाढ़ से फसलें बर्बाद हुई हैं, जबकि कर्नाटक और महाराष्ट्र में अभी भी सूखे जैसे हालात बने हुए हैं।
मानसून की रिकवरी का डेटा
भारत में मानसून के आखिरी दौर में हुई भारी बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। अगस्त के अंत में यह घाटा 14% था, जो अब घटकर 12% पर आ गया है। 'इंडिया मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट' (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में बारिश 152.6 mm दर्ज की गई, जो लॉन्ग-पीरियड औसत से सिर्फ 5% कम है। 26 सितंबर को तो स्थिति ऐसी थी कि देश भर में बारिश का स्तर सामान्य औसत से 162% ऊपर पहुंच गया था।
उत्तर प्रदेश में तबाही और दक्षिण में सूखा
बारिश का यह असंतुलन अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। एक तरफ उत्तर प्रदेश के खीरी, बांदा और बहराइच जैसे जिलों में बाढ़ से 31,000 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि प्रभावित हुई है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। वहीं, दूसरी तरफ कर्नाटक और महाराष्ट्र के बड़े हिस्से अभी भी सूखे की चपेट में हैं।
कृषि क्षेत्र और महंगाई पर असर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी मौसम की इस अस्थिरता पर चिंता जताई है। यह क्षेत्रीय असमानता सरकार के लिए कृषि नियोजन और आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर बड़ी चुनौती पेश कर रही है। निवेशकों के लिए यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि रबी और खरीफ फसलों की पैदावार में कमी आने से फूड इन्फ्लेशन यानी खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिसका सीधा असर ग्रामीण डिमांड और सप्लाई चेन पर पड़ेगा।
